February 24, 2024

OMG – दुनिया की सबसे महंगी सब्‍जी, 1 किलो की कीमत में आ जाए 15 ग्राम सोने के झुमके…

रायपुर। क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे महंगी सब्जी कौन सी है? अगर आप सोचते हैं कि आपको इसे खरीदने के लिए 5 या 10 हजार रुपये खर्च करने होंगे, तो आप का अंदाजा गलत है. दुनिया की सबसे कीमती सब्‍जी हॉप शूट्स (Hop Shoots) की कीमत सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे. उड़े भी क्‍यों नहीं, 1 किलो हॉप शूट्स खरीदने में आपको जितने पैसे देने पड़ेंगे उतने में आप 15 ग्राम सोना खरीद सकते हैं. 1 किलोग्राम हॉप शूट्स की कीमत 85,000 रुपये (Hop Shoots Price) है. इसलिए इस सब्‍जी को खरीदना आम आदमी के बस का काम नहीं है. इसे खरीदना और खाना टाटा-बिड़ला जैसे धनाड्य लोगों के ही बूते की बात है.

अमेरिका और यूरोप में होन वाला होप शूट्स को उगाना, तैयार करना और तोड़ना काफी मेहनत वाला और मुश्किल काम है. यही कारण है कि इसकी कीमत बहुत ज्‍यादा है. भारत में हॉप शूट्स की खेती नहीं होती है. हिमाचल में इसे पैदा करने की कोशिश की गई थी, परंतु सफलता नहीं मिली. इस सब्जी में अनेकों औषधीय गुण हैं. हॉप शूट्स के फूल को हॉप कोन्स कहते हैं. इसके फूल का उपयोग बीयर बनाने में होता है, जबकि टहनियों और पत्तों की सब्‍जी बनाई जाती.

यह सब्जी एक बारहमासी पर्वतीय पौधा है. यूरोप और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी इसे पहले खरपतवार मानते थे. बाद में इसके गुणों को देखकर उन्‍होंने इसकी खेती शुरू कर दी है. इसका वैज्ञानिक नाम Humulus lupulus है. यह हेम्प परिवार के कैनाबेसी पौधे की एक प्रजाति है. यह मध्यम गति से 6 मीटर (19 फीट 8 इंच) तक बढ़ सकता है और 20 साल तक जीवित रह सकता है.

हॉप शूट्स के इतने महंगे होने का कारण यह है कि एक तो इसे उगाने के लिए खास जलवायु की जरूरत होती है. इसलिए इसे हर जगह नहीं उगाया जा सकता. दूसरा हॉप शूट्स का पौधा तीसरे साल उत्‍पादन देता है. हॉप के पौधे के लगाने और इस रखरखाव पर बहुत पैसा खर्च होता है. हॉप शूट्स की के पत्तों और फल का उपयोग, सब्‍जी और अचार बनाने में होता है. हॉप शूट्स का अधिकतम उपयोग बीयर बनाने में होता है. इसके पत्तों और फूल की तोड़ाई बहुत सावधधानीपूर्वक की जाती है और इसमें बहुत मेहनत लगती है.

जियॉन मार्केट रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, हॉप शूट्स का फिलहाल वैश्विक कारोबार 8.1 बिलियन डॉलर है. हॉप शूट्स का बाजार सालाना 4.6 फीसदी सीएजीआर से बढ़ रहा है. साल 2030 तक इसके 15.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

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