February 28, 2026

जेल से बाहर आते ही पिता के पैर छूकर गले लगाया, कहा- न्याय की जीत हुई, रिहाई पर क्या बोले पूर्व सीएम के बेटे

chaitanya

रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के एक दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शनिवार को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। चैतन्य बघेल को पिछले साल 18 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने घोटाले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में थे।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ईडी द्वारा दर्ज मामले और छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज मामले में शुक्रवार को उनकी जमानत याचिकाएं मंजूर की थीं।

पिता के पैर छूकर लगाया गले
रिहाई के दौरान भूपेश बघेल बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के साथ जेल परिसर के बाहर मौजूद रहे। समर्थकों ने पिता–पुत्र के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान पार्टी के झंडे लहराए गए और ढोल बजाए गए। जेल से बाहर निकलने के बाद चैतन्य बघेल ने अपने पिता के पैर छूकर उन्हें गले लगाया। इसके बाद वह एक गाड़ी में बैठकर बाहर निकले।

गाड़ी से बाहर निकलते समय उन्होंने गाड़ी की छत से समर्थकों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन किया और कांग्रेस का झंडा भी लहराया। चैतन्य बघेल ने कहा, ‘‘न्याय में देरी हुई, लेकिन न्याय मिला है। मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। मुझे संविधान पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि मामला अदालत में होने के कारण वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।”

क्या बोले भूपेश बघेल
अपने बेटे की रिहाई पर भूपेश बघेल ने कहा कि जमानत ‘‘सरकार द्वारा प्रायोजित साजिशों’’ के खिलाफ एक जीत है। उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय के आदेश से पूरे राज्य में खुशी की लहर है और विभिन्न जिलों से पार्टी कार्यकर्ता रायपुर पहुंचे हैं। बघेल ने आरोप लगाया, ‘एक साजिश के तहत ईडी ने 18 जुलाई को चैतन्य को उनके जन्मदिन पर गिरफ्तार किया था और उनकी रिहाई बेटे के जन्मदिन पर हुई।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी, आयकर, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है।

क्या कहा था कोर्ट ने
उच्च न्यायालय ने ईडी के मामले में जमानत याचिका पर अपने आदेश में कहा कि आवेदक की कथित भूमिका पहले ही जमानत पा चुके कई अन्य आरोपियों की तुलना में ‘‘निश्चित तौर पर कमतर’’ है। अदालत ने कहा कि कथित सरगना और अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों को पहले ही उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल चुकी है और आवेदक को जमानत न देना समानता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा।

ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। केंद्रीय एजेंसी का दावा है कि घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ। ईडी ने दावा किया था कि चैतन्य कथित शराब घोटाले के ‘सिंडिकेट’ का मुखिया था और उसने लगभग एक हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रबंधन किया।

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