September 13, 2026

CJI सूर्यकांत ने पहले दिन बनाया नया नियम, असाधारण स्थितियों में ही स्वीकार होंगे मौखिक अनुरोध

surykant

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने CJI के तौर पर अपने पहले दिन एक नया प्रक्रियात्मक नियम (procedural norm) बनाया कि तत्काल सूचीबद्ध (Urgent listing) के लिए केस का जिक्र लिखकर करना होगा, और मौत की सजा तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे “असाधारण स्थितियों” में ही मौखिक अनुरोध पर ध्यान दिया जाएगा.

जस्टिस कांत ने राष्ट्रपति भवन में हिंदी में शपथ लेने के तुरंत बाद भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के तौर पर औपचारिक रूप से पदभार संभाला. कोर्ट की कार्यवाही दोपहर के आसपास शुरू हुई.

सीजेआई कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने हेरिटेज कोर्ट रूम नंबर एक में CJI के तौर पर अपने पहले दिन करीब 17 केस सुने. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर भी शामिल थे.

सीजेआई ने हिमाचल प्रदेश की एक प्राइवेट फर्म के खिलाफ फाइल की गई याचिका पर फैसला सुनाया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के अध्यक्ष विपिन नायर ने लोगों से भरे कोर्टरूम में नए चीफ जस्टिस का स्वागत किया.

कार्यवाही की शुरुआत में, सीजेआई ने यह साफ कर दिया कि “असाधारण” स्थितियों को छोड़कर, तत्काल लिस्टिंग के लिए अनुरोध का मौखिक रूप से जिक्र के बजाय लिखित में मेंशनिंग स्लिप के जरिये की जानी चाहिए. उन्होंने एक वकील से कहा, “अगर आपको कोई तत्काल मेंशनिंग करनी है, तो तात्कालिक होने का कारण बताते हुए अपनी मेंशनिंग स्लिप दें; रजिस्ट्रार जांच करेंगे और उन मामलों में, अगर हमें कोई अविलंब चीज मिलती है, तो उस पर विचार करेंगे.”

वकील ने जोर देकर कहा कि मामला अति-आवश्यक है. सीजेआई ने कहा, “जब तक कोई खास परिस्थिति न हों, जब किसी की आजादी शामिल हो, मौत की सजा आदि का सवाल हो, तभी मैं इसे सूचीबद्ध करूंगा. नहीं तो, प्लीज मेंशन करें… रजिस्ट्री फैसला करेगी और मामले को लिस्ट करेगी.”

एक मामले में, मणिपुर में कथित न्यायेतर हत्या (Extra-judicial killing) के पीड़ितों के परिवारों ने कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की. एक वकील ने कहा कि परिवारों को “कम से कम यह जानने का हक है कि क्या हुआ था”.

पीठ ने कहा कि जांच पहले से ही चल रही है और “NIA की जांच की स्थिति जानने के मकसद से” नोटिस जारी किया गया है.

इससे पहले, पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट लिस्टिंग के लिए मामलों को मौखिक अनुरोध करने की प्रैक्टिस जारी रखने से मना कर दिया था. हालांकि, जस्टिस खन्ना की जगह लेने वाले जस्टिस बीआर गवई ने इसे फिर से शुरू कर दिया. आमतौर पर, वकील पीठ के सामने अर्जेंट लिस्टिंग के लिए सीजेआई के सामने मामलों को मौखिक रूप से मेंशन करते हैं.

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