एक FIR जिसके बाद देवजी बना खूंखार नक्सली, मई में बना था माओवादियों का लीडर, सरेंडर पर भाई ने कही बड़ी बात
रायपुर। नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। तेलंगाना पुलिस के सामने टॉप माओवादी लीडर थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी और मल्ला राजू रेड्डी ने सरेंडर कर दिया। देवजी के आत्मसमर्पण करने से प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) को सबसे बड़ा झटका लगा है। रविवार को देवजी ने संयुक्त आदिलाबाद जिले के आसिफाबाद जंगलों में पुलिस के सामने सरेंडर किया है। देवजी के साथ 16 और माओवादियों ने भी हथियार डाले हैं।
मई में बना था नक्सली संगठन का लीडर
देवजी पिछले साल मई में छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू की हत्या के बाद से संगठन का नेतृत्व कर रहा था। देवजी सबसे वांछित माओवादी नेताओं में से एक था। तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले का रहने वाला देवजी सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य और पुलिस ब्यूरो सदस्य था। उस पर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित था।
देवजी पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का गठन किया था और भाकपा (माओवादी) के प्रमुख केंद्रीय समिति सदस्य और माओवादी पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य बना था। देवजी, छत्तीसगढ़ के माड़ से संचालित केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के प्रभारी के रूप में कार्यरत था।
देवजी कैसे बना नक्सली
सूत्रों के अनुसार, 1982 में जगतियाल जिले के कोरुतला में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान वह रैडिकल स्टूडेंट यूनियन (आरएसयू) की ओर आकर्षित हुआ। करीमनगर जिले में आरएसयू और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों के बीच झड़पें हुईं और देवजी को इस मामले में आरोपी बनाया गया था। इसके बाद देवजी 1983 में भाकपा माले (पीडब्ल्यूजी) में शामिल हुआ और भूमिगत हो गया।
सूत्रों के अनुसार, 1983-1984 के दौरान उसने गढ़चिरोली दलम में दलम सदस्य के रूप में काम किया और 1985 में उसे क्षेत्रीय समिति सदस्य के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद 2001 में उसे केंद्रीय समिति सदस्य के रूप में पदोन्नत किया गया और 2016 में वह सीएमसी का प्रभारी था।
परिवार ने जताई खुशी
खूंखार नक्सली देवजी के छोटे भाई गंगाधर ने इस घटनाक्रम पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “हमें बहुत खुशी है कि हम लंबे समय बाद अपने भाई से मिल पाएंगे।” उन्होंने याद किया कि देवजी के घर छोड़ने के बाद से परिवार उनसे दशकों से नहीं मिला था। गंगाधर ने कहा, “माओवादी समूह में शामिल होने के बाद, हम उनसे मिल नहीं पाए। मीडिया में प्रकाशित तस्वीरों के अलावा, हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं रहा।”
उन्होंने बताया कि देवजी की शादी हो चुकी थी, लेकिन उसकी पत्नी का बाद में देहांत हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके बड़े भाई वेंकटी भी अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि उनकी बहन फिलहाल हैदराबाद में रहती है।
