February 17, 2026

CG : मंत्रालय के नाम पर में बड़ा ‘कार रेंटल घोटाला’, 15 लग्जरी गाड़ियां लेकर आरोपी फरार, सियासत शुरू

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंत्रालय और सरकारी विभागों में गाड़ियां लगाने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. आरोप है कि 2 युवकों ने बेहतर भुगतान और स्थायी कॉन्ट्रैक्ट का झांसा देकर 15 से ज्यादा वाहन मालिकों से लग्जरी गाड़ियां किराए पर ले ली. कई महीने बीत जाने के बाद वाहन मालिकों को न तो किराया चुकाया और न ही गाड़ियां वापस की. पीड़ित वाहन मालिकों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई की मांग की है. मामले में कांग्रेस नेता पंकज शर्मा की एंट्री के बाद इस घटनाक्रम में सियासी मोड़ भी आ गया है.

मंत्रालय के नाम पर कार रेंटल घोटाला
पीड़ितों के मुताबिक रोहित सरोज और शशिकांत यादव नाम के युवकों ने दावा किया कि वे मंत्रालय और अन्य सरकारी विभागों में गाड़ियां लगवाते हैं, जहां नियमित भुगतान और अच्छा किराया मिलेगा. इस भरोसे में कई वाहन मालिकों ने लोन पर गाड़ियां खरीदकर एग्रीमेंट के तहत उन्हें सौंप दी. शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ ही दिनों में न तो किराया मिला और न ही गाड़ियों का कोई पता चला. आरोप है कि गाड़ियों का GPS बंद कर दिया गया और उन्हें या तो गिरवी रख दिया गया या बेच दिया गया.

15 से ज्यादा वाहन, लाखों का बकाया
दर्ज शिकायत के अनुसार, अलग-अलग मालिकों की करीब 15 गाड़ियां इस कथित जालसाजी का शिकार हुई हैं. जिन गाड़ियों को लगाने के नाम पर लिया गया उनमें ज्यादातर गाड़ियां लग्जरी हैं. कई मामलों में 25 हजार से लेकर 2 लाख तक की बकाया राशि बताई गई है. कुल मिलाकर लाखोंं का नुकसान सामने आया है. वाहन मालिकों का कहना है कि वे बैंक की ईएमआई भरने के लिए परेशान हैं, जबकि उनकी गाड़ियां गायब हैं.

एजेंट भी फंसा, कमिश्नर कार्यालय में सामूहिक शिकायत
इस पूरे मामले में एजेंट प्रेमराज साहू का नाम भी सामने आया है, जो गाड़ियों को किराए पर लगाने का काम करता है. प्रेम का कहना है कि उसे भी आरोपियों ने झांसे में रखा और मंत्रालय में गाड़ी लगाने का भरोसा दिलाया. जब गाड़ियां और भुगतान नहीं मिला तो वे सभी वाहन मालिकों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत सौंपी. वाहन मालिक ठाकुरदास मानिकपुरी ने कहा, उन्होंने भरोसे में गाड़ी दी थी, लेकिन अब न गाड़ी मिल रही है और न ही पैसा.

कांग्रेस नेता की एंट्री से खड़ा हुआ सियासी सवाल
मामले की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता पंकज शर्मा भी कमिश्नर कार्यालय पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाया कि अगर मंत्रालय और सरकारी विभागों का नाम लेकर यह धोखाधड़ी की गई है, तो इसकी गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने इसे संगठित गिरोह की आशंका बताते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की.

आरोपी फरार, संगठित गिरोह के शामिल होने की आशंका
पीड़ितों के अनुसार, आरोपी रोहित सरोज सिविल लाइन क्षेत्र के पास का रहने वाला है, जबकि शशिकांत यादव मठपुरैना क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है. फिलहाल दोनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. पीड़ितों का दावा है कि यह कोई बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जो किराए पर गाड़ियां लेकर उन्हें फाइनेंस या निजी सौदों में खपा देता है.

सख्त कार्रवाई और दोषियों को गिरफ्तार किए जाने की मांग
वाहन मालिकों ने पुलिस से IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और अमानत में खयानत के तहत मामला दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है. यह घटना उन सभी लोगों के लिए चेतावनी है, जो बिना ठोस सत्यापन, मजबूत एग्रीमेंट और ट्रैकिंग सुरक्षा के गाड़ियां किराए पर देते हैं. अब नजर पुलिस की कार्रवाई पर है कि राजधानी में हुए इस बड़े ‘कार रेंटल घोटाले’ में पीड़ितों को कितनी जल्दी न्याय मिल पाता है.

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