नींद के तरीके से चल जाएगा बीमारियों का पता, AI डिवाइस यूं करेगा काम
मुंबई। अब बीमारी का अंदाज़ा लगाने के लिए सिर्फ खून की जांच या स्कैन ही ज़रूरी नहीं रहेंगे. वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान की नींद भी उसकी सेहत से जुड़े कई बड़े संकेत छुपाए होती है. इसी सोच के साथ स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक खास AI सिस्टम तैयार किया है, जो नींद के पैटर्न को समझकर भविष्य में होने वाली बीमारियों का जोखिम बता सकता है. नींद के दौरान दिमाग, हार्ट और सांस से जुड़े सिग्नल शरीर के अंदर चल रही गड़बड़ियों की ओर इशारा करते हैं. इस नई तकनीक से बीमारियों की पहचान पहले ही संभव हो सकती है, जिससे इलाज समय पर शुरू किया जा सके.
यह शोध नींद और शरीर की अंदरूनी एक्टिविटी के गहरे संबंध को समझने पर आधारित है. वैज्ञानिकों ने AI की मदद से नींद के डेटा में छुपे स्वास्थ्य संकेतों को पहचाना है, जो भविष्य में मेडिकल जांच के तरीके बदल सकता है. आइए इस रिसर्च के बारे में डिटेल में जानते हैं.
नींद के डेटा से बीमारियों के खतरे को पहचानने वाली खोज
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस शोध में पाया कि नींद सिर्फ आराम का जरिया नहीं, बल्कि शरीर की स्थिति बताने वाला एक अहम संकेत भी है. जब इंसान सोता है, उस दौरान दिमागी सिग्नल, हार्ट की धड़कन, सांस लेने का तरीका और शरीर की हलचल लगातार बदलती रहती है. AI सिस्टम इन सभी संकेतों को एक साथ पढ़ता है और यह समझने की कोशिश करता है कि शरीर में कोई गड़बड़ी तो नहीं चल रही.
इस AI सिस्टम के ज़रिए हार्ट की बीमारी, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, कैंसर, पार्किंसन, डिमेंशिया और प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताओं के संकेत मिल सकते हैं. शोध में सामने आया कि कुछ खास नींद के पैटर्न इन बीमारियों के खतरे से जुड़े हो सकते हैं. यह खोज इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें बीमारी होने से पहले ही जोखिम के संकेत मिल जाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, नींद के जरिए शरीर खुद अपनी सेहत की कहानी बता देता है, जिसे अब AI समझने में सक्षम हो रहा है.
हज़ारों लोगों की नींद से तैयार हुआ AI सिस्टम
इस AI सिस्टम को तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने हज़ारों लोगों की नींद से जुड़ा डेटा इस्तेमाल किया. इसमें नींद के दौरान रिकॉर्ड की गई दिमागी एक्टिविटी, हार्ट रेट और सांस से जुड़ी जानकारी शामिल है. AI ने इस बड़े डेटा से यह सीखा कि कौन से नींद के पैटर्न सामान्य हैं और कौन से पैटर्न भविष्य में बीमारी का संकेत दे सकते हैं.
जैसे-जैसे AI ने ज्यादा डेटा देखा, उसकी समझ और सटीक होती गई. यही वजह है कि यह सिस्टम सिर्फ नींद की गुणवत्ता नहीं बताता, बल्कि शरीर के अंदर चल रहे बदलावों को भी पहचान सकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक आगे चलकर मेडिकल साइंस में एक नया अध्याय जोड़ सकती है.
भविष्य में इलाज और बचाव के लिए जरूरी
यह शोध इसलिए ज़रूरी माना जा रहा है क्योंकि इससे बीमारियों की पहचान शुरुआती दौर में हो सकती है. अक्सर लोग तब डॉक्टर के पास जाते हैं, जब बीमारी गंभीर हो चुकी होती है. अगर नींद के जरिए पहले ही खतरे का संकेत मिल जाए, तो समय रहते सावधानी और इलाज संभव है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में हेल्थ चेक-अप का हिस्सा बन सकती है. इससे डॉक्टरों को मरीज की सेहत समझने में मदद मिलेगी और आम लोगों को भी अपनी नींद को लेकर ज्यादा जागरूक होने का मौका मिलेगा.
