September 17, 2026

‘अव्यवस्था मानने का कोई आधार नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने CJP के विरोध मार्च पर रोक लगाने से किया इनकार

SC-supreem

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक विरोध मार्च करने से रोकने से मना कर दिया और भरोसा जताया कि विरोध शांतिपूर्ण और कानूनी रहेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अभी ऐसी कोई मजबूर करने वाली हालत नहीं है जिससे यह माना जा सके कि कुछ गलत होगा…” इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने की.

एक आवेदक का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील रिजवान अहमद ने तर्क दिया, “मांग क्या है, क्या यह जरूरी है? पुलिस एफआईआर में नामजद लोगों को गिरफ्तार करने के लिए उन पर छापे मार रही है. जवाब है नहीं. तो, कॉकरोच जनता पार्टी जो भी पूछ रही है, वह उनके लिए काम का हो सकता है…लेकिन क्या वे ब्रिक्स समिट खत्म होने का 10 दिन इंतजार नहीं कर सकते और फिर सरकार को अप्लाई नहीं कर सकते.

अगर सरकार इजाजत नहीं देती है, तो वे तत्काल उल्लेख के लिए सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं…” सीजेआई ने बताया कि इसमें दो मुद्दे शामिल हैं: पहला कानून और व्यवस्था, और दूसरा यह कि यह एक पॉलिसी मुद्दा है.

सीजेआई ने कहा कि कोर्ट अभी यह मानकर चल रहा है कि हर कोई बहुत जिम्मेदारी से और शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से काम करेगा और व्यवहार करेगा. सीजेआई ने कहा, “अभी ऐसी कोई मजबूर करने वाली परिस्थितियां नहीं हैं जिससे यह माना जा सके कि कुछ भी गलत होगा…”

अहमद ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय मीडिया यहां है…और अनुभव से अंदाजा लगता है…भगवान न करे कोई और हादसा हो जाए—सीजेपी की वजह से नहीं, शायद किसी शरारती तत्व की वजह से…,”.

उन्होंने पीठ से इस मामले पर नोटिस जारी करने और 3 या 4 सितंबर को सुनवाई करने की अपील की. पीठ ने कहा कि इस मामले पर आखिर में पुलिस अधिकारियों को ही विचार करना होगा और वह इस आवेदन को मेन केस के साथ टैग कर रही है. अहमद ने कहा कि ग्रुप ऐसा बर्ताव कर रहा था जैसे बीएनएसएस उन पर लागू नहीं होता और उन्होंने जोर दिया कि उन्हें संबंधित पुलिस स्टेशन से अनुमति लेनी होगी.

उन्होंने कहा, ‘‘ये ऐसे मुद्दे हैं जिनका ध्यान कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों को रखना है.” पीठ ने कहा, “कानून और व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है. वे कहेंगे कि क्या कानूनी है या गैर-कानूनी, या क्या जायज है…”

सीजेआई ने कहा, “हम सभी पहलुओं पर गौर नहीं कर सकते. हम हर चीज पर कमेंट नहीं करेंगे. कृपया हमारी बनाई हाई-पावर्ड कमेटी के पास जाएं.”

पीठ ने आगे कहा कि कमेटी एक-एक करके मुद्दों पर विचार करेगी और कोर्ट को अपना जवाब देगी. सीजेआई ने हाई-पावर्ड कमेटी को “न्यूट्रल अंपायर” कहा और कहा कि हितधारकों को बड़ी पॉलिसी और कानून-व्यवस्था के सवालों पर विचार-विमर्श करना चाहिए.

पीठ रिटायर्ड दिल्ली पुलिस ऑफिसर राजेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनका केस अहमद ने लड़ा था. याचिका में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिस कर्मियों के लिए मुआवजा और कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों से सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली की मांग की गई थी.

याचिकाकर्ता ने संसद और दूसरे जरूरी सरकारी इंस्टीट्यूशन के पास होने वाले प्रदर्शनों को नियंत्रण करने के लिए एक फ्रेमवर्क की भी मांग की, जिसमें कोई प्रदर्शन नहीं या सुरक्षात्मक क्षेत्र बनाना भी शामिल है. याचिका में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसवालों के लिए मुआवजा और सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई जिम्मेदार लोगों से करने की मांग की गई है.

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