CG : प्यास की पुकार, जब मासूमों के सूखे हलक, तो फूट पड़ा जनता का गुस्सा
रायपुर। गले में प्यास की तड़प, हाथों में खाली मटके और आंखों में प्रशासन के खिलाफ गुस्सा.ये नजारा है छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का, जहां अभी गर्मी की तपिश शुरू भी नहीं हुई है और पानी के लिए हाहाकार मच गया है. जब घरों के नल सूखे पड़ गए, तो मजबूरन जनता को नगर निगम की चौखट पर आकर ‘मटका फोड़’ प्रदर्शन करना पड़ा. विडंबना देखिए, प्यास बुझाने की मांग को लेकर पहुंची माताएं अपने बच्चों को बोतल और पाउच के पानी से किसी तरह शांत कराती नजर आईं.
मासूमों की प्यास और प्रशासन की चुप्पी
प्रदर्शन के दौरान सबसे भावुक कर देने वाली तस्वीर तब दिखी जब चिलचिलाती धूप में प्रदर्शन कर रही महिलाएं अपने बच्चों को पानी पिलाने के लिए संघर्ष करती रहीं. कोई पाउच फाड़कर बच्चे का गला तर कर रही थी, तो कोई बोतल से उसे राहत देने की कोशिश कर रही थी. यह सवाल खड़ा करता है कि क्या स्मार्ट सिटी की परिभाषा में ‘पीने का पानी’ शामिल नहीं है?
लोगों का मटका फोड़ प्रदर्शन
काफी संख्या में पहुंचे महिला-पुरुष रायपुर नगर निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए. प्रदर्शनकारियों के हाथों में निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां थीं. लोगों ने हाथों में मटके उठाकर जोरदार नारेबाजी की और फिर निगम गेट पर मटका फोड़कर अपना गुस्सा जताया. यह दृश्य राजधानी में गहराते जल संकट की गंभीर तस्वीर पेश कर रहा था.
पीएम आवास योजना के घरों में भी पानी का संकट
रायपुर नगर निगम के कांग्रेस पार्षद एवं नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों से लोग पानी की मांग को लेकर निगम के चक्कर काट रहे हैं. यदि पाइपलाइन नहीं है तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, बोरिंग कराई जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि जिन कॉलोनियों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बने हैं, वहां भी पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है.
नगर निगम के रायपुर को ‘टैंकर मुक्त’ किए जाने के दावे को खोखले हैं. धरातल पर स्थिति इसके उलट है. यहां तक कि भाजपा पार्षद भी अपने ही महापौर के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि जल संकट को लेकर असंतोष व्यापक है-आकाश तिवारी, नेता प्रतिपक्ष, रायपुर नगर निगम
सवाल बड़ा है, प्यास कब बुझेगी?
गर्मी की शुरुआत से पहले ही राजधानी में पानी को लेकर इस तरह का प्रदर्शन कई सवाल खड़े कर रहा है. क्या नगर निगम समय रहते ठोस समाधान निकाल पाएगा? या फिर बढ़ती गर्मी के साथ लोगों की प्यास और आक्रोश भी बढ़ता जाएगा? राजधानी में फूटे ये मटके केवल मिट्टी के नहीं थे, बल्कि प्रशासनिक दावों पर उठे सवालों की गूंज भी थे.
