January 9, 2026

CG : हाईकोर्ट ने व्याख्याता प्रमोशन पर लगायी अंतरिम रोक, जानिये क्यों फंस गया पेंच

CG HIGHCOURT

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ में व्याख्याता प्रमोशन से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। शिक्षक और प्रधान पाठक से व्याख्याता पद पर की जा रही पदोन्नति प्रक्रिया पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। यह रोक फरवरी 2026 के पहले सप्ताह तक प्रभावी रहेगी। कोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग द्वारा काउंसिलिंग के माध्यम से की जा रही पोस्टिंग की तैयारी भी फिलहाल रोक दी गई है।

दरअसल, भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार व्याख्याता के कुल पदों में से 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 50 प्रतिशत पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान है। इसी नियम के तहत पिछले महीने शिक्षा विभाग ने लगभग 400 व्याख्याताओं के ई-संवर्ग (Teacher LB Cadre) से पदोन्नति आदेश जारी किए थे। आदेश जारी होने के बाद विभाग द्वारा काउंसिलिंग के जरिए पदस्थापना की तैयारी चल रही थी।

इसी दौरान रायगढ़ और बलौदाबाजार जिलों के 2009 में नियुक्त प्रधान पाठकों सहित कुछ नियमित ई-संवर्ग शिक्षकों ने इस प्रमोशन प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विभाग ने वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप दिए बिना और लंबित न्यायिक प्रकरणों के बावजूद 22 दिसंबर 2025 को एक नई डीपीसी आयोजित कर दी, जो नियमों के विपरीत है।

2009 के प्रधान पाठकों में क्यों फंसा मामला?
इस विवाद की जड़ वर्ष 2008–09 में की गई प्रधान पाठक भर्ती से जुड़ी हुई है। वर्ष 2008 में राज्य सरकार ने बिलासपुर, बलौदाबाजार, रायगढ़ सहित कुछ जिलों में प्रधान पाठक पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। कुछ जिलों में भर्ती प्रक्रिया पूरी भी हुई, लेकिन बाद में बिलासपुर जिले का विज्ञापन रद्द कर दिया गया। वहीं, बलौदाबाजार और रायगढ़ जैसे जिलों में कुछ प्रधान पाठकों की नियुक्ति 2010 में हो गई, जो बाद में न्यायिक विवाद का विषय बनी।

मामला कोर्ट में जाने के बावजूद इन जिलों के प्रधान पाठक सेवा में बने रहे। जब व्याख्याता प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई, तब शिक्षा विभाग ने 2009 में नियुक्त प्रधान पाठकों की वरिष्ठता को मान्य नहीं किया। इसी वजह से ये शिक्षक व्याख्याता प्रमोशन से वंचित रह गए, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। हालांकि दलील ये दी गयी, कि उनके प्रमोशन में कोई कानूनी बाधा नहीं थी।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए?
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में आरोप लगाया है कि जब मामला पहले से न्यायालय में लंबित था, तब बिना अंतिम वरिष्ठता सूची जारी किए और छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2019 का उल्लंघन करते हुए 22 दिसंबर 2025 को एक नई डीपीसी आयोजित की गई। इस डीपीसी में केवल Teacher (LB) संवर्ग को शामिल किया गया, जबकि ई-संवर्ग के नियमित शिक्षकों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया।

याचिका में इसे मनमानी, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (समान अवसर का अधिकार) का उल्लंघन बताया गया है।

हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 22.12.2025 को हुई डीपीसी पर अंतरिम स्टे लगा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक इस डीपीसी के आधार पर कोई भी पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा, न ही कोई चयन सूची प्रकाशित होगी और न ही किसी को जॉइनिंग दी जाएगी।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में असमंजस की स्थिति बन गई है। अब सभी की नजरें फरवरी के पहले सप्ताह में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि व्याख्याता प्रमोशन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या इसमें बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

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