July 26, 2024

कुछ मोहल्ला क्लास स्कूलों में ही… आ रही बच्चों की भीड़, लोगों ने कहा- ‘इससे अच्छा स्कूल खोल दें’

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना के चलते करीब डेढ़ सालों से स्कूल बंद हैं. ऐसे में छात्रों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन क्लास संचालित की जा रही हैं. हालांकि ऑनलाइन क्लास में एक बड़ा वर्ग, जिसे इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीण अंचलों मोबाइल नेटवर्क की समस्या है. वहीं गरीब वर्ग मोबाइल खरीदने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में सरकार ने विकल्प के तौर पर मोहल्ला क्लास (Mohalla Class) शुरू की है, जिसमें शिक्षक गांव, मोहल्लों में क्लास संचालित कर रहे हैं. इस प्रयोग का अच्छा रिस्पांस भी मिल रहा है. लेकिन इसमें कई दिक्कतें भी हैं. राजधानी में ही कुछ स्कूलों में लापरवाही पूर्वक मोहल्ला क्लास का संचालन किया जा रहा हैं। बच्चों को स्कूल बुलाकर निर्माणाधीन भवन में बिठाकर पढ़ाया जा रहा हैं। 

रायपुर जिले में करीब 1000 मोहल्ला क्लासेस चल रही हैं. इनमें से ज्यादातर में बहुत छोटी सी जगहों पर काफी संख्या में छात्रों को बैठाया जा रहा है. यहां न तो पर्याप्त बैठक व्यवस्था है. न ही दूसरे संसाधन मौजूद हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जब मोहल्ला की अनुमति दी जा रही है. बच्चों को एक जगह इकट्ठा करने दिया जा रहा है, तो फिर स्कूल खोलने में ही क्या बुराई है. जहां पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है. इन मोहल्ला क्लासों से ज्यादा कोरोना गाइड लाइन का पालन स्कूलों में किया जा सकता है.

कोरबा जिले के कटघोरा स्थित दुर्पा हाई स्कूल में मोहल्ला क्लास संचालित की जा रही है. हालांकि बच्चों की संख्या अभी कम है. लेकिन मोहल्ला क्लास में पढ़ाई जारी है. यह क्लास ऑनलाइन क्लास से बेहतर है. स्कूल प्रांगण में सार्वजनिक मंच के नीचे, खुली और छायादार जगह में मोहल्ला क्लास लग रही है. जहां बच्चे पढ़ने पहुंच रहे हैं.

आदिवासी बाहुल्य सरगुजा जिले में भी मोहल्ला क्लास लगाई जा रही है. जिले के सकोला ग्राम में पेड़ के नीचे बच्चों को बैठाकर शिक्षक पढ़ा रहे हैं. यहां बच्चे भी मोहल्ला क्लास में रुचि ले रहे हैं. क्लास में बच्चों की संख्या बढ़ी है. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करते हुए, पेड़ के नीचे ब्लैक बोर्ड लगाकर टीचर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. लेकिन बारिश होने पर खुले आसमान के नीचे पढ़ना कठिन हो जाता है, ऐसी स्थिति में यहां के टीचर इस दिन ऑनलाइन क्लास का सहारा लेते हैं.

नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में भी मोहल्ला क्लास का संचालन किया जा रहा है. जिले के पुसवाड़ा इलाके के पटौद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बरामदे में क्लास लगाई जा रही है. स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि बारिश के दिन में बाहर क्लास लगाने में दिक्कत होती है. कई बार दरी के नीचे सांप और बिच्छू के निकलने का खतरा बढ़ जाता है. इस कारण बरामदे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है.

पिछले दिनों सूरजपुर पहुंचे प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा था कि कोरोना के चलते फिलहाल प्रदेश में स्कूल खोलना संभव नहीं है. शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम के मुताबिक प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है, जिसको देखते हुए फिलहाल स्कूल खोलना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि कोरोना की स्थिति सामान्य होने के बाद बैठक में यह निर्णय लिया जाएगा कि स्कूल कब खोला जाएगा. स्कूल खोलने को लेकर शिक्षा मंत्री ने किसी भी तारीख का ऐलान करने से साफ तौर से मना किया है.

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