भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 6.7 अरब डॉलर की भारी गिरावट, स्वर्ण भंडार में बड़ी कमी बनी मुख्य वजह
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में 6.711 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इस कमी के बाद देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 717.064 अरब डॉलर रह गया है.
गौरतलब है कि इससे ठीक पिछले सप्ताह भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.361 अरब डॉलर की जबरदस्त बढ़त के साथ 723.774 अरब डॉलर के अपने अब तक के उच्चतम स्तर (All-time high) पर पहुंच गया था. एक ही सप्ताह के भीतर भंडार में आई यह गिरावट बाजार विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है.
स्वर्ण भंडार में भारी सेंध
केंद्रीय बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस गिरावट का सबसे प्रमुख कारण स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) के मूल्य में आई कमी है. समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान भारत के स्वर्ण भंडार का मूल्य 14.208 अरब डॉलर घटकर 123.476 अरब डॉलर रह गया. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन के कारण यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है.
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में बढ़त
हालांकि, सोने के भंडार में गिरावट के बावजूद विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) में तेजी देखी गई. कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली ये परिसंपत्तियां 7.661 अरब डॉलर बढ़कर 570.053 अरब डॉलर पर पहुंच गईं. एफसीए (FCA) में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में होने वाले बदलावों को भी शामिल किया जाता है.
अन्य घटकों की स्थिति
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, देश के विशेष आहरण अधिकार (SDR) और आईएमएफ (IMF) के पास आरक्षित स्थिति में भी मामूली कमी आई है:
SDR: इसमें 132 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 18.821 अरब डॉलर रह गया.
IMF आरक्षित स्थिति: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत का आरक्षित कोष 32 मिलियन डॉलर घटकर 4.715 अरब डॉलर पर आ गया.
गिरावट के मायने
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में यह उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में बदलाव और विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए हस्तक्षेपों के कारण हो सकता है. भारी गिरावट के बावजूद, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी वैश्विक स्तर पर बेहद मजबूत स्थिति में बना हुआ है, जो देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षा प्रदान करता है.
