‘मंत्री का नाम लेकर डराता है, एक साल से अफसर NOC नहीं दे रहा’, कलेक्टरेट के सामने आत्महत्या का प्रयास
बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में बुधवार को एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के ठीक सामने उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक युवक ने आत्महत्या का प्रयास करते हुए अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया और आग लगाने की कोशिश करने लगा। हालांकि मौके पर तैनात सुरक्षा जवानों की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया और युवक की जान बचा ली गई।
आत्महत्या का प्रयास करने वाले युवक की पहचान आरिफ बाठिया के रूप में हुई है, जो पेशे से ठेकेदार बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार आरिफ ने बेमेतरा में कृषि विभाग के लिए एक शासकीय भवन का निर्माण कार्य पूरा किया था। ठेकेदार का आरोप है कि भवन निर्माण पूरा हुए करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो भवन का हैंडओवर लिया गया है और न ही उसे उसके कार्य का भुगतान किया गया है।
घटना के दौरान आरिफ बाठिया ने कलेक्ट्रेट के सामने खुद पर पेट्रोल उड़ेला और माचिस जलाने ही वाला था कि वहां मौजूद सुरक्षा जवानों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उसके हाथ से माचिस छीन ली। इसके बाद युवक को काबू में लेकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। इस पूरी घटना को देखकर वहां मौजूद लोग सन्न रह गए और कुछ देर के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप की स्थिति बन गई।
आरिफ बाठिया ने आरोप लगाया है कि कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उसने बताया कि भवन निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद कृषि विभाग द्वारा एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं दी जा रही है, जिसके कारण उसका भुगतान अटका हुआ है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे ठेकेदार का कहना है कि वह पिछले एक साल से विभाग के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है।
ठेकेदार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी वह कृषि विस्तार अधिकारी आर.के. चतुर्वेदी से मिलने जाता है, तो उसे मंत्री दयालदास बघेल का नाम लेकर डराया जाता है। आरिफ का आरोप है कि उसे कहा जाता है कि मंत्री स्तर से ही एनओसी देने से मना किया गया है, इसलिए उसका भुगतान नहीं हो सकता। इस वजह से वह लगातार मानसिक दबाव में था और आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो गया।
आरिफ बाठिया ने यह भी कहा कि कृषि विस्तार अधिकारी की प्रताड़ना और भुगतान न मिलने की वजह से उसका परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। कर्ज और जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे होने के कारण उसने यह खतरनाक कदम उठाया। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर समय रहते उसकी जान न बचाई जाती, तो इसके लिए पूरी तरह विभागीय अधिकारी जिम्मेदार होते।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंची। युवक को समझाइश देकर शांत कराया गया और पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि युवक के आरोपों की जांच की जा रही है और संबंधित विभाग से भी जवाब तलब किया जाएगा।
