‘जो इलाके आंतक के अंधेरे में डूबे थे अब वहां विकास की रोशनी’, राष्ट्रपति ने युवाओं से किया संवाद, बताए चार संकल्प
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 2 दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर गुरुवार को रायपुर पहुंचीं. बूढ़ापारा स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में उन्होंने शिरकत की. इस दौरान राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ी में उपस्थित लोगों का अभिवादन किया. कार्यक्रम में ‘छत्तीसगढ़ महतारी की जय’ के नारे भी गूंजे.
राष्ट्रपति ने नुआखाई पर्व को कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामाजिक एकता का प्रतीक बताते हुए युवाओं से निरंतर सीखने, चुनौतियों का सामना करने और अपनी सफलता को समाज की प्रगति से जोड़ने का आह्वान किया.
केंद्र और राज्य सरकार के ज्वाइंट ऑपरेशन से आज नक्सलवाद खत्म हो चुका है. नक्सली समाज की मुख्यधारा से जुड़कर काम कर रहे हैं. जहां कभी आतंक का अंधेरा था वहां आज विकास का उजियारा फैल गया है. इस बदलाव से छत्तीसगढ़ के विकास को नया आयाम और बदलाव मिला है: द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रपति
नुआखाई पर्व पर राष्ट्रपति का छत्तीसगढ़ आगमन, पारंपरिक अंदाज में स्वागत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन को लेकर आयोजित कार्यक्रम में नुआखाई पर्व की सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश प्रमुखता से सामने आया. बूढ़ापारा स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित समारोह में जनप्रतिनिधियों, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की उपस्थिति रही. राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ी में लोगों का अभिवादन कर स्थानीय संस्कृति के प्रति अपना जुड़ाव व्यक्त किया. इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर ‘छत्तीसगढ़ महतारी की जय’ के नारे भी लगाए गए.
नुआखाई केवल त्योहार नहीं, हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता का उत्सव: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि नुआखाई मिलन समारोह में उपस्थित होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई है. उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक समारोह या पर्व नहीं है, बल्कि हमारी परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का उत्सव है. ऐसे आयोजन लोगों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने, सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और आने वाली पीढ़ियों तक जीवन-मूल्यों को पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं. नुआखाई हमारी कृषि परंपराओं को संजोने, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामुदायिक भावना को मजबूत करने वाला पर्व है. राष्ट्रपति ने कहा कि नई फसल के आगमन पर अन्न देवता को सम्मान देना और परिवार तथा समाज के साथ खुशियां बांटना इस पर्व का मूल भाव है. यह अवसर कृषि और किसानों के योगदान को याद करने का भी मौका है.
‘अन्न का सम्मान करना और किसानों के योगदान को स्वीकारना हम सबका दायित्व’
राष्ट्रपति ने कृषि परंपरा और किसानों के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि अन्न केवल हमारी भूख मिटाने का साधन नहीं है. यह किसान भाई-बहनों के परिश्रम, धरती की उर्वरता और प्रकृति के अनमोल उपहार का प्रतीक भी है. अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है. नुआखाई जैसे पर्व हमें याद दिलाते हैं कि हमारी समृद्धि प्रकृति, कृषि और समाज के सामूहिक प्रयासों से जुड़ी हुई है.
युवाओं से राष्ट्रपति का आह्वान, लक्ष्य तय कर संकल्प के साथ आगे बढ़ें
राष्ट्रपति ने युवा प्रबोधन कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा,”आज के युवाओं के सामने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, खेल, कला, कृषि और सामाजिक सेवा सहित अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हैं. युवाओं को जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए. उन्हें यह विचार करना चाहिए कि वे क्या बनना चाहते हैं और किस रूप में देश तथा समाज की सेवा करना चाहते हैं. लक्ष्य स्पष्ट होने पर उपलब्ध अवसरों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है. वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. आज के युवा ही देश का भविष्य हैं और उनके प्रयासों से भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है. युवाओं को प्रोत्साहित करना, उन्हें अवसर उपलब्ध कराना और उनके व्यक्तित्व का विकास करना समाज के सभी वर्गों की जिम्मेदारी है.”
राष्ट्रपति ने युवाओं को दिए जीवन में आगे बढ़ने के तीन प्रमुख संकल्प
पहला संकल्प: राष्ट्रपति ने युवाओं से कहा कि जीवन में लगातार सीखते रहना चाहिए. पुस्तकें पढ़ें, प्रश्न पूछें, नई तकनीकों को समझें और स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करते रहें. सीखने की इच्छा व्यक्ति को प्रगतिशील बनाती है और उसे नए अवसरों के लिए तैयार करती है.
दूसरा संकल्प: राष्ट्रपति ने कहा कि जीवन में सफलता और असफलता दोनों मिलती हैं. असफलता से निराश होने के बजाय यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि गलती कहां हुई और किन कारणों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिला. अपनी गलतियों से सीखकर उनमें सुधार करना और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता है.
तीसरा संकल्प: राष्ट्रपति ने युवाओं से कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. उन्हें अपने परिवार, समाज और देश की प्रगति में भी योगदान देना चाहिए. जीवन में आगे बढ़ने के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद करना और दूसरों को अवसर उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है.
‘आधुनिकता के साथ संस्कृति और परंपराओं को भी सहेजकर रखें’
राष्ट्रपति के संबोधन का एक महत्वपूर्ण संदेश अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का भी रहा. नुआखाई जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, कृषि संस्कृति और सामुदायिक जीवन के मूल्यों से परिचित कराते हैं. आधुनिक विज्ञान और तकनीक के दौर में आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन इसके साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. समाज की वास्तविक प्रगति तभी सार्थक होगी, जब विकास के साथ मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक जिम्मेदारियां भी बनी रहें.
राज्यपाल ने राष्ट्रपति के संघर्ष और सेवा को बताया प्रेरणादायक
कार्यक्रम में राज्यपाल ने नुआखाई के पावन अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति को प्रेरणादायक बताया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने संघर्ष, समर्पण और सेवा के बल पर यह साबित किया है कि दृढ़ संकल्प और सच्ची लगन से किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है. राज्यपाल ने रक्तदान करने वाली महिलाओं और अन्य रक्तदाताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है. रक्तदान से किसी जरूरतमंद मरीज को नया जीवन मिल सकता है और किसी परिवार की उम्मीद बच सकती है. उन्होंने युवाओं से सेवा की भावना को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया. उनके अनुसार, युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान भी हैं. विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है.
1,100 से अधिक महिलाओं के रक्तदान का मुख्यमंत्री ने किया उल्लेख
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर बताया. उन्होंने कहा कि नुआखाई पर्व के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति से प्रदेशवासियों को प्रेरणा मिली है. मुख्यमंत्री ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बड़ी संख्या में महिलाओं के रक्तदान का उल्लेख किया. उनके अनुसार, इस अभियान में 1,100 से अधिक महिलाओं ने रक्तदान किया. उन्होंने रक्तदान करने वाली माताओं और बहनों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल सेवा, संवेदना और मानवता के प्रति समर्पण का उदाहरण है. मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से स्वागत और अभिनंदन किया. उन्होंने आयोजन के लिए संबंधित जिला प्रशासन और रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा के प्रयासों का भी उल्लेख किया.
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सांस्कृतिक संबंधों पर मुख्यमंत्री ने की चर्चा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नुआखाई पर्व के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व कृषि, आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है. नई फसल आने पर उसे सबसे पहले इष्ट देवता को अर्पित करने और उसके बाद ग्रहण करने की परंपरा इस पर्व की मूल भावना को दर्शाती है. उन्होंने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों क्षेत्रों की परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक जीवन में कई समानताएं हैं. नुआखाई जैसे पर्व इन सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करते हैं.
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है. इस लक्ष्य को पूरा करने में युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रही है. प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने और युवाओं को तकनीकी तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, रायपुर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना और कौशल विकास से जुड़ी पहलों पर काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण से युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे. उन्होंने प्रदेश में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने, तकनीकी शिक्षा के विस्तार और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयासों का भी उल्लेख किया. मुख्यमंत्री के अनुसार, युवाओं को शिक्षा, प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें राज्य तथा देश के विकास में भागीदार बनाया जा सकता है.
सेवा, संस्कृति और युवा शक्ति का संदेश देकर संपन्न हुआ आयोजन
रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में नुआखाई पर्व की सांस्कृतिक परंपरा, किसानों के प्रति सम्मान, रक्तदान के माध्यम से मानव सेवा और युवाओं की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रहे. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवाओं को निरंतर सीखने, असफलताओं से सबक लेने और अपनी सफलता को समाज की प्रगति से जोड़ने का संदेश दिया. वहीं, राज्यपाल ने सेवा और समर्पण के महत्व को रेखांकित किया तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई.
