बस्तर में क्रिकेट का भगवान, खेल क्रांति की ओर दंतेवाड़ा, बच्चों को सचिन की बड़ी सीख, सीएम साय ने कहा- छत्तीसगढ़ का सौभाग्य
जगदलपुर। बस्तर से नक्सलवाद की छाया हटने के बाद अब उम्मीदों का सूरज उदय होने लगा है.इसी कड़ी में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का ऐतिहासिक दौरे किया. ऐसा पहली बार है जब ‘क्रिकेट के भगवान’ अपने परिवार के साथ इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में खेल और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पहुंचे.
सीएम साय ने सचिन तेंदुलकर का किया स्वागत
सीएम विष्णुदेव साय ने सचिन तेंदुलकर के छत्तीसगढ़ के आने का स्वागत किया. सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है की क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर यहां आए. खेल प्रेमियों और क्रिकेट प्रेमियों के लिए सौभाग्य का विषय है.
जगदलपुर एयरपोर्ट में हुआ स्वागत
सचिन तेंदुलकर अपने प्राइवेट जेट से जगदलपुर पहुंचे. इस दौरान उनके स्वागत के लिए जिला प्रशासन के आला अफसरों के साथ स्थानीय बच्चे भी आए थे. सचिन तेंदुलकर ने अभिवादन स्वीकार किया.सचिन तेंदुलकर ने बस्तर में आने की वजह भी बताई. सचिन तेंदुलकर ने बताया कि 50 स्कूल मैदानों को विकसित किया जाएगा. जहां बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं मिलेंगी. मैदान में प्रतियोगिताओं के जरिए हजारों बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा. इस पहल को मानदेशी फाउंडेशन और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन का सहयोग मिल रहा है.
बच्चों के बीच सचिन बने बच्चे
सचिन तेंदुलकर को बच्चों ने अपने बीच पाकर खुशी जाहिर की. इस दौरान सचिन ने मैदान में बच्चों के साथ कई तरह के गेम खेले.इन्हीं में से एक था रस्साकशी का खेल.इस खेल में सचिन बच्चों के साथ मिलकर उनकी हौसला अफजाई की. सचिन के लिए मैदान में हर पल खास था. बच्चों के साथ खेलते हुए सचिन भी काफी खुश नजर आए. बच्चों की हंसी और तालियों के बीच यह साफ महसूस हुआ कि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का सबसे मजबूत जरिया है.
मंच से बच्चों के साथ किया संवाद
इसके बाद सचिन ने बच्चों और स्थानीय लोगों को संबोधित किया. सचिन तेंदुलकर ने कहा कि आज मैं आप लोगों से ज्यादा खुश हूं. आपसे मुझे दिल से प्यार मिला है. यह मेरे लिए एक अमूल्य अनुभव है. हमारी फाउंडेशन ने स्थानीय टीम के साथ मिलकर अच्छा काम किया है.इसके लिए मैं स्थानीय प्रशासन का भी दिल से धन्यवाद देता हूं.
स्कूल में मैदान नहीं होने का दर्द
सचिन ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि बस्तर के कई स्कूलों में खेल के मैदान नहीं हैं और बच्चे खेल नहीं पाते, तो उन्हें अपना बचपन याद आ गया. उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्होंने इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया और शासन-प्रशासन के सहयोग से इसमें सुधार संभव हो पाया. सचिन ने भावुक अंदाज में अपने परिवार का भी जिक्र किया.
हमारे फाउंडेशन की कप्तान पत्नी अंजलि हैं, बेटी सारा फाउंडेशन से जुड़ी हुई हैं, जबकि बेटे अर्जुन अपने क्रिकेट कमिटमेंट के कारण यहां नहीं आ पाए.लेकिन हमारी कोशिश है कि हम वो सारी सुविधा उन बच्चों तक पहुंचा पाएं जिनके वो हकदार हैं.मैं सिर्फ बच्चों से यही कहना चाहता हूं कि जो मौका आप लोगों को मिल रहा है उसे हाथ से जाने मत दीजिए.किसी भी काम को सही तरीके से करने के लिए लगातार प्रैक्टिस की जरुरत होती है. प्रैक्टिस से ही हम उस काम में निपुण होते हैं.इसलिए मैं आपसे कहना चाहूंगा कि आप भी जिस काम को करें चाहे वो पढ़ाई हो या फिर खेल उसमें लगन के साथ अपनी ताकत झोकिएं- सचिन तेंदुलकर,पूर्व क्रिकेटर
बच्चों के साथ मनाया जन्मदिन
24 अप्रैल को सचिन का जन्मदिन है. लेकिन उन्होंने छिंदनार में बच्चों के बीच ही केक काटकर अपना जन्मदिन मनाया. आपको बता दें कि सचिन तेंदुलकर का ये दौरा दंतेवाड़ा की छवि को ‘नक्सल प्रभावित’ क्षेत्र से बदलकर एक ‘स्पोर्ट्स हब’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.सचिन ने अपने दौरे के दौरान तीन इवेंट में हिस्सा लिया.
मल्टी-स्पोर्ट्स ग्राउंड का उद्घाटन
सचिन ने दंतेवाड़ा के छिंदनार गांव में एक आधुनिक मल्टी-स्पोर्ट्स ग्राउंड का उद्घाटन किया. इस मैदान को सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन और मानदेशी फाउंडेशन के सहयोग से विकसित किया गया है.
