CG : RTE विवाद के बीच प्राइवेट स्कूलों का बड़ा फैसला, ‘नहीं बढ़ाई राशि, तो नहीं लेंगे एडमिशन’, 6000 स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया ठप!
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में सरकार और स्कूल प्रबंधन के बीच RTE विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच प्राइवेट स्कूलों ने बड़ा फैसला लेते हुए स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश देने से इंकार कर दिया है। निजी स्कूलों का मत है कि राशि नहीं बढ़ाई, तो एडमिशन नहीं लेंगे। आपको बता दें इससे 6000 स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया पर इसका असर होगा। जिसका सीधा असर गरीब बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा।
प्राइवेट स्कूलों का बड़ा फैसला
हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप लगाते हुए प्राइवेट स्कूलों ने आरोप लगाया है कि 14 साल से जो प्रतिपूर्ति फीस नहीं बढ़ी है उसे लेकर सभी प्राइवेट स्कूल संचालक असहयोग आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच हमने फैसला लिया है कि अब किसी भी निजी स्कूल में गरीब बच्चों को आरटीई के तहत एडमिशन नहीं दिया जाएगा। इसका जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
राशि बढ़ाओ नहीं तो एडमिशन नहीं देगे
लॉटरी के माध्यम से जो भी विद्यार्थी एडमिशन लेगा उसे हम प्रवेश नहीं देंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की होगी। निजी स्कूलों ने RTE के तहत एडमिशन लेने से इनकार कर दिया है। इसका पूरा असर 6000 स्कूलों में पड़ेगा। आपको बता दें कम प्रतिपूर्ति राशि पर सरकार से आर-पार की लड़ाई हो गई है। जिसमें हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप निजी स्कूलों ने लगाया है।
RTE प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग, 14 साल से नहीं बढ़ी राशि, प्रवेश नहीं देने की चेतावनी : छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने RTE के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि की मांग की है. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के मुताबिक 14 साल से RTE के बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि में किसी तरह की कोई वृद्धि नहीं की गई है. साल 2011 से सरकार से RTE के बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि मात्र 7000 रुपए मिल रही है जो बहुत कम है. दूसरे राज्यों में यह राशि ज्यादा है. ऐसे में छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 1 मार्च 2026 से असहयोग आंदोलन शुरू किया है. इसके तहत सरकार के किसी भी पत्र या नोटिस का जवाब नहीं दिया जा रहा है. अब आने वाले दिनों में लॉटरियों के माध्यम से बच्चों का स्कूलों में प्रवेश दिया जाना भी बंद कर दिया जाएगा.

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि पिछले 14 साल से शिक्षा के अधिकार कानून के तहत दी जाने वाली राशि में किसी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. इसका विरोध प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट कर रहा है. साल 2011 में जितने भी प्राइवेट स्कूल में आरटीई के बच्चे एडमिशन लिए उन्हें कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक 7 हजार रुपए दिए गए. छठवीं से आठवीं तक साढ़े सात हजार रुपए तय किए गए थे. इसी प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाने के लिए हम 14 साल से संघर्ष कर रहे हैं. जुलाई 2025 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका की सुनवाई 19 सितंबर 2025 को आई जिसमें कोर्ट ने कहा कि 6 महीने के अंदर प्राइवेट स्कूल के आवेदन पर विचार किया जाए और इनकी प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाई जाए.
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद भी शासन प्रशासन ने कोई निर्णय नहीं लिया. इसलिए मजबूरन छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 1 मार्च 2026 से असहयोग आंदोलन की शुरुआत की है. इस आंदोलन के तहत शासन प्रशासन के द्वारा किसी भी तरह के पत्र और नोटिस का जवाब नहीं दिया जा रहा है. इसके साथ ही किसी भी कार्यक्रम में स्कूल बस की मांग की जाती है तो हम बस देने से इनकार कर रहे हैं. लिहाजा शासन अब दबाव बना रहा है- राजीव गुप्ता,अध्यक्ष,प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
गरीब बच्चों के प्रवेश पर मंडराया खतरा
राजीव गुप्ता ने बताया कि 1 महीने के असहयोग आंदोलन के बाद भी सरकार के कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. जिसकी वजह से प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन अब स्कूलों में लाटरियों के माध्यम से जिन बच्चों का चयन होगा उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाएगा. यह एक कठोर निर्णय है जिसको हमने बड़ी मुश्किल उठाया है. हम नहीं चाहते कि गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे प्रवेश से वंचित हो. हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है और हम मजबूर हैं. जिसकी वजह से इस तरह का कदम हमें उठाना पड़ रहा है. स्कूल शिक्षा विभाग हमारी बातें भी नहीं सुन रहा है. छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की मांग है कि कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक 18000 रुपए की मांग की है. इसी तरह कक्षा छठवीं से लेकर आठवीं तक के बच्चों के लिए 25000 हजार की मांग की है.
