February 19, 2026

छत्तीसगढ़ में डिजिटल किसान किताब लॉन्च, मोबाइल पर मिलेगा जमीन का लेखा जोखा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस को नई मजबूती देने का काम किया गया है. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने रायपुर से डिजिटल किसान किताब को लॉन्च किया है. इसके साथ ही उन्होंने उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली (भाग 1 से 4) पुस्तक का भी विमोचन किया. इस पहल को किसानों और भूमिधारकों को पारदर्शी, त्वरित और आधुनिक सेवाएं देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.

अब ऑनलाइन मिलेगी किसान किताब
डिजिटल किसान किताब अब पारंपरिक मैन्युअल किसान किताब का स्थान लेगी. किसानों को अपनी भूमि संबंधी पूरी जानकारी भुइया पोर्टल पर B-1 एवं P-II रिपोर्ट के साथ ऑनलाइन उपलब्ध होगी. वे इसे कहीं से भी देख और डाउनलोड कर सकेंगे.डिजिटल प्रणाली में भूमि से जुड़े आवश्यक विवरण अपने आप अपडेट होते रहेंगे. इससे संशोधन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी. इसके साथ ही, संबंधित पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति मिलने से दस्तावेजों की वैधता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी.

डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका का शुभारंभ छत्तीसगढ़ में राजस्व सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. यह राज्य को डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा- टंकराम वर्मा, राजस्व मंत्री, छत्तीसगढ़

बैंक लोन और योजनाओं में मिलेगी सहूलियत
मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिका केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस पहल है. छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए भूमि पर निर्भर हैं.अब ऋण पुस्तिका से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन और रियल टाइम में उपलब्ध होने से किसानों को कई तरह की सहूलित मिल सकेगी. किसानों को बैंक ऋण, फसल ऋण और शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी. इससे खामियों में कमी आएगी और अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित होगी.इससे प्रशासनिक प्रक्रिया भी अधिक आसान हो सकेगी.

भू-अभिलेख नियमावली का विमोचन
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली (भाग 1 से 4) का भी विमोचन किया गया. यह पुस्तक उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित है, जिसमें छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के सर्कुलर और आदेशों का संकलन किया गया है. अब तक बाजार में उपलब्ध पुस्तक मध्य प्रदेश के लेखक-प्रकाशक की थी, जिसमें मध्यप्रदेश के सर्कुलर शामिल थे.

नई पुस्तक में वर्ष 2000 के बाद मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी वे सर्कुलर शामिल नहीं किए गए हैं, जो छत्तीसगढ़ में लागू नहीं हैं. इसके स्थान पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी अद्यतन सर्कुलर को अध्याय-वार शामिल किया गया है.परिशिष्ट में सर्वे, राजस्व वन भूमि अभिलेख, गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जारी नवीनतम सर्कुलर जोड़े गए हैं. इसके साथ ही, प्रश्नोत्तर, इकाई परिवर्तन और शब्दार्थ भी सम्मिलित किए गए हैं. यह पुस्तक बाजार के साथ-साथ ई कॉमर्स साइट और जेम पोर्टल पर भी उपलब्ध होगी.

डिजिटल छत्तीसगढ़ को मिलेगी मजबूती
इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने राजस्व विभाग, NIC और परियोजना से जुड़े अधिकारियों को बधाई दी है. इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे डिजिटल सुविधा का अधिकतम उपयोग करें. उन्होंने कहा कि यह पहल डिजिटल छत्तीसगढ़ की अवधारणा को मजबूती देगी. इस पहल से शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूती मिलेगी.

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