कोयला घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदला, सौम्या चौरसिया समेत सभी अभियुक्तों को राहत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले और डीएमएफ मामलों में फंसे अभियुक्तों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। 28 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न विशेष अनुमति याचिकाओं (आपराधिक) पर सुनवाई करते हुए ईओडब्ल्यू-एसीबी छत्तीसगढ़ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मामलों में अभियुक्तों को पहले दी गई अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में परिवर्तित कर दिया।
लंबी हिरासत और धीमी सुनवाई बना आधार
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में इस बात को खास तौर पर रेखांकित किया कि अभियुक्त पहले ही लंबी अवधि तक न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं। कई मामलों में अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं और मुकदमे प्रारंभिक चरण में ही अटके हुए हैं। अदालत ने माना कि ऐसे हालात में अभियुक्तों को लगातार जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है।
सौम्या चौरसिया को बड़ी राहत
इन मामलों में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया को सबसे बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ ईओडब्ल्यू/एसीबी और ईडी द्वारा दर्ज कई मामलों में पहले अंतरिम जमानत दी गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए नियमित जमानत में बदल दिया है। कोयला प्रकरण और डीएमएफ मामलों में सौम्या चौरसिया को अलग-अलग तारीखों पर गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने महीनों से लेकर लगभग दो साल तक की हिरासत झेली है।
अन्य अभियुक्तों को भी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सौम्या चौरसिया के साथ-साथ रानू साहू, सूर्यकांत तिवारी और समीर विश्नोई सहित अन्य सह-अभियुक्तों को भी बड़ी राहत दी है। इसके अलावा कोयला और डीएमएफ मामलों में शामिल कई अन्य नामों हेमंत जायसवाल, चंद्र प्रकाश जायसवाल, संदीप कुमार नायक, वीरेंद्र जायसवाल उर्फ मोंटू, रजनीकांत तिवारी, दीपेश टोंक, राहुल सिंह, शिव शंकर नाग, रोशन सिंह और अन्य की जमानत भी जारी रखी गई है।
जमानत की शर्तें रहेंगी लागू
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निष्पक्ष जांच के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत के दौरान लगाई गई सभी शर्तें यथावत लागू रहेंगी। अभियुक्तों को अपने पासपोर्ट न्यायालय में जमा करने होंगे और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जा सकेंगे। इसके साथ ही ट्रायल की अवधि के दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और केवल सुनवाई की तारीख से एक दिन पहले ही राज्य में प्रवेश करने की अनुमति होगी। जांच एजेंसियों को सहयोग करना भी अनिवार्य रहेगा।
न्यायालय का अहम संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के जरिए यह संदेश दोहराया है कि मुकदमे के शुरुआती चरण में, जब अभियुक्त लंबी हिरासत भुगत चुके हों और ट्रायल में देरी हो रही हो, तब निरंतर कारावास उचित नहीं माना जा सकता। यह फैसला आने वाले समय में अन्य लंबित मामलों के लिए भी एक अहम मिसाल माना जा रहा है।
अगली सुनवाई पर नजर
न्यायालय ने जयचंद कोशल से जुड़े एक नए प्रकरण को 29 जनवरी 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इस मामले में अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा।
