छत्तीसगढ़ में ACB की बड़ी कार्रवाई : कोरबा में 50 हजार की रिश्वत लेते AE रंगे हाथ गिरफ्तार, अंबिकापुर में भ्रष्ट RI को 4 साल की सजा
कोरबा। छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई लगातार जारी है। बुधवार को राज्य के दो अलग-अलग जिलों से सामने आए मामलों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि रिश्वतखोरी को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक ओर कोरबा जिले में विद्युत विभाग का असिस्टेंट इंजीनियर रिश्वत लेते पकड़ा गया, तो दूसरी ओर अंबिकापुर में पुराने मामले में अदालत ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर को सजा सुना दी।
कोरबा में ट्रांसफार्मर के नाम पर रिश्वत
पहला मामला कोरबा जिले के दीपका थाना क्षेत्र का है। यहां एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने विद्युत विभाग के असिस्टेंट इंजीनियर सत्येंद्र दिवाकर को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम रलिया निवासी किसान श्यामता टंडन अपने खेत में ट्रांसफार्मर लगवाना चाहता था। इसके लिए उसने विद्युत विभाग में विधिवत आवेदन किया था। जांच के दौरान सामने आया कि आवेदन के बाद मौके का निरीक्षण करने पहुंचे असिस्टेंट इंजीनियर ने ट्रांसफार्मर लगाने के बदले चालान शुल्क के अलावा “नाश्ता-पानी” के नाम पर 80 हजार रुपए की मांग की।
पहले ले चुका था 30 हजार रुपए
पीड़ित किसान ने मजबूरी में पहले ही 30 हजार रुपए आरोपी को दे दिए थे। लेकिन जब बाकी 50 हजार रुपए की मांग की गई, तो उसने रिश्वत देने से इनकार कर दिया और पूरे मामले की शिकायत बिलासपुर स्थित एसीबी कार्यालय में कर दी।
शिकायत की सत्यापन प्रक्रिया में आरोप सही पाए गए। इसके बाद 28 जनवरी को ट्रैप की योजना बनाई गई। जैसे ही असिस्टेंट इंजीनियर ने अपने दीपका स्थित कार्यालय में किसान से 50 हजार रुपए की रिश्वत ली, एसीबी टीम ने घेराबंदी कर उसे मौके पर ही पकड़ लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद की गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए डीएसपी एसीबी बिलासपुर अजितेश सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी तत्काल सूचना एसीबी को दें।
अंबिकापुर में RI को 4 साल की सजा
दूसरा मामला सरगुजा जिले के अंबिकापुर से जुड़ा है, जहां अदालत ने रिश्वतखोरी के एक पुराने मामले में सख्त फैसला सुनाया है।
कृष्णानगर निवासी अर्चना खाखा ने 17 जुलाई 2020 को एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनके पति द्वारा खरीदी गई जमीन का नक्शा काटने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के बदले तत्कालीन रेवेन्यू इंस्पेक्टर राजबहादुर सिंह ने 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
ट्रैप में पकड़ा गया था आरोपी
जांच के दौरान यह साबित हुआ कि आरोपी 10 हजार रुपए से कम लेने को तैयार नहीं था। 7 अगस्त 2020 को एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी को 8 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 28 जनवरी 2026 को विशेष न्यायालय ने राजबहादुर सिंह को 4 साल के कठोर कारावास और 5 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
