January 29, 2026

52 दिन की हकीकत, 125 दिन का हल्ला, जी राम जी पर सवालों से बचते सीएम साय बोले, छोड़ो कल की बातें

vishnudeosai

रायपुर। जिन हाथों से सरकार मनरेगा में सालभर में 52 दिन का भी रोजगार नहीं दे पाई, उन्हीं हाथों से अब जीराम जी में 125 दिन की गारंटी का ढोल पीटा जा रहा है. सवाल उठा तो जवाब मिला पुरानी बातें छोड़ दीजिए. यह बातें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज का भाजपा प्रदेश कार्यालय के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान कही.

रोजगार के आंकड़ों से ज्यादा बयानबाज़ी पर भरोसा जताती सरकार नई योजना के बड़े-बड़े वादों से अपनी नाकामी ढकने में जुटी दिखी. भुगतान की दर से लेकर समयसीमा तक कई सवाल हवा में लटके रहे, जबकि नाम बदलने और फंडिंग के फार्मूले पर सियासी तकरार ने इस योजना को रोजगार से ज्यादा राजनीति का मुद्दा बना दिया.

52 दिन बनाम 125 दिन, आंकड़ों से भागती सरकार
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत छत्तीसगढ़ में औसतन 52 दिन का ही रोजगार मिल पाया, लेकिन अब VB-JRJ यानी ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना में 125 दिन रोजगार देने के दावे किए जा रहे हैं. हकीकत और दावे के बीच के इस फासले ने सवालों की लंबी कतार खड़ी कर दी है.

सवाल पर बोले सीएम साय, छोड़ी पुरानी बातें
जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से पूछा गया कि जो सरकार 52 दिन भी रोजगार नहीं दे पाई, वह 125 दिन कैसे देगी, तो जवाब आया, पुरानी बातें छोड़ दीजिए. जवाब से ज़्यादा बचाव की मुद्रा में दिखी सरकार के लिए आंकड़े बोझ बनते नज़र आए.

भुगतान का वादा, दर पर सन्नाटा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ‘जीराम जी’ के तहत एक हफ्ते में भुगतान होगा और देरी पर अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी. लेकिन भुगतान की दर क्या होगी, अतिरिक्त राशि कितनी मिलेगी.इन अहम सवालों पर सरकार ठोस जवाब नहीं दे सकी.

60:40 फॉर्मूला, राज्य पर बढ़ेगा बोझ
नई योजना में केंद्र 60% और राज्य 40% हिस्सेदारी देगा. आर्थिक बोझ बढ़ने के सवाल पर सीएम साय ने कहा कि बजट में प्रावधान किया जाएगा. उनका तर्क था कि पहले 100% केंद्र से पैसा आने पर राज्य इसे “फ्री की योजना” समझता था, अब राज्यांश होगा तो काम बेहतर होगा.

नाम बदलने पर क्या बोले सीएम साय ?
कांग्रेस के विरोध पर सीएम साय ने पलटवार करते हुए कहा कि देश की कई योजनाओं में महात्मा गांधी का नाम नहीं है, जबकि एक ही परिवार के नाम पर कई परियोजनाएं चलाई गईं. उन्होंने 1948 में गांधी द्वारा कांग्रेस को भंग करने की बात और “हे राम” के अंतिम शब्दों का ज़िक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा.

जी राम जी योजना रोजगार की गारंटी से पहले सियासी बयानबाज़ी और नामकरण की जंग में उलझती दिख रही है. 52 दिन की हकीकत पर पर्दा डालकर 125 दिन के वादों का शोर कितना टिकाऊ होगा. इसका जवाब फिलहाल “पुरानी बातें छोड़ दीजिए” के आगे नहीं बढ़ सका.

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