January 13, 2026

कौन हैं हीराबाई झरेका बघेल? जिन्हें राष्ट्रपति ने किया है सम्मानित, पिता और पति से सीखी थी वर्षों पुरानी कला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की हीराबाई झरेका बघेल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया है। हीराबाई को ये सम्मान ढोकरा कला और अनूठी शिल्पकारी के लिए दिया गया। मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान दिया गया है। हीराबाई झरेका बघेल की इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने बधाई दी है।

छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
सीएम विष्णुदेव साय ने कहा- सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की ढोकरा–बेलमेटल शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया जाना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। वनांचल ग्राम पंचायत बैगीनडीह से निकलकर अपनी अनूठी धातुकला से देशभर में छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊंचाई देने वाली बघेल की यह उपलब्धि हमारी समृद्ध लोककला, परंपरा और ग्रामीण प्रतिभा की चमक को राष्ट्रीय मंच पर पुनः स्थापित करती है। यह छत्तीसगढ़ के हर शिल्पकार का सम्मान है। हमारी सरकार कला-संरक्षण, प्रशिक्षण और बाजार विस्तार के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि यह सम्मान केवल हीराबाई झरेका बघेल का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के हर शिल्पकार का सम्मान है। हमारा राज्य अपनी कला, संस्कृति और हस्तशिल्प पर गर्व करता है।

कौन हैं हीराबाई झरेका बघेल?
हीराबाई झरेका बघेल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की वनांचल ग्राम पंचायत बैगीनडीह गांव की रहने वाली हैं। वे ढोकरा कला की शानदार शिल्पकार हैं। उन्होंने अपने पिता भुलाऊ झरेका और पति मिनकेतन बघेल से ये कला सीखी है। साल 2011-12 के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने भी उन्हें सम्मानित किया। उनके पति मिनकेतन बघेल को भी वर्ष 2006-07 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया गया था।

क्या है ढोकरा कला
ढोकरा कला के बारे में कहा जाता है कि यह छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी धरोहर है। झरेका बघेल उन शिल्प कलाकारों में से हैं जिन्होंने इन परंपराओं को आधुनिक समय के अनुरूप जीवंत बनाए रखने का काम किया है।

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