January 14, 2026

छत्तीसगढ़ में नई जमीन गाइडलाइन लागू, रीयल एस्टेट कारोबार पर संकट गहराया

REAL STATE

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद रीयल एस्टेट सेक्टर में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। पहले से ही सुस्ती झेल रहे रीयल एस्टेट कारोबार में निवेशक लगातार दूरी बनाए हुए थे, लेकिन नई रजिस्ट्री दरों ने मकान, प्लॉट और जमीन की खरीद-बिक्री को और मुश्किल बना दिया है। त्योहारी सीजन के बावजूद इस साल रीयल एस्टेट मार्केट में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई, जिससे कारोबारियों की चिंता और बढ़ गई है।

सोने-चांदी में बढ़ता निवेश
राज्य में सोने के लगातार बढ़ते दामों ने भी रीयल एस्टेट बाजार को कमजोर (real estate recession) किया है। घरों और जमीन में लंबे समय तक निवेश करने वाले लोग अब सोना और चांदी को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है- मकानों और प्लॉट्स की बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रही।

नई गाइडलाइन से रजिस्ट्री महंगी
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि नई गाइडलाइन के बाद रजिस्ट्री का खर्च कई गुना बढ़ (house registry expensive) गया है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी इलाके में जमीन की वास्तविक कीमत 50 लाख से बढ़कर 60 लाख हो गई है, तो रजिस्ट्री (land registry rates) के दौरान खरीदार को इतना अधिक शुल्क देना पड़ेगा कि थोड़े से लाभ पर मकान बेचने का चलन लगभग खत्म हो जाएगा।

पहले निवेशक 1-2 साल में मकान बेचकर मुनाफा कमा लेते थे, लेकिन अब रजिस्ट्री की बढ़ी लागत मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर देती है। यही कारण है कि खरीदार मकान लेने से पहले कई बार सोच रहे हैं, और बिल्डरों की बिक्री में भी भारी गिरावट आ रही है।

GST स्लैब बदलने से मिला फायदा
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा GST स्लैब में बदलाव के बाद सीमेंट और बिल्डिंग मटेरियल पर लागत कम होने की उम्मीद थी। साथ ही किसी भी हाउसिंग स्कीम में 30 फीसदी के स्थान पर 40 फीसदी एरिया में फ्लैट बनाने की अनुमति मिलने से परियोजनाओं की लागत कम होने वाली थी। लेकिन नई जमीन गाइडलाइन ने इस राहत को पीछे छोड़ते हुए बिल्डरों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। जमीन की कीमत बढ़ने से मकान का बहुमूल्य हिस्सा अब रजिस्ट्री में ही निकल जा रहा है, जिससे खरीदार आकर्षित नहीं हो पा रहे।

संयुक्त जमीन खरीदना लगभग असंभव
नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा असर संयुक्त जमीन खरीदी पर पड़ा है। पहले तीन या उससे अधिक लोग मिलकर जमीन खरीद लेते थे और बाद में दाम बढ़ने पर उसे बेच देते थे या प्लॉटिंग कर देते थे। अब यदि किसी क्षेत्र में एक एकड़ जमीन की कीमत 2 करोड़ है, और वहाँ जमीन का दर 1500 रुपये प्रति वर्ग फीट है, तो तीन लोगों के नाम पर रजिस्ट्री करने पर कीमत सीधी साढ़े छह करोड़ तक पहुँच जाती है। यानी जहाँ 20 लाख की स्टांप ड्यूटी अपेक्षित थी, वहाँ अब 65 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इस भारी अंतर ने संयुक्त जमीन खरीदी के बाजार को लगभग खत्म कर दिया है।

रीयल एस्टेट कारोबारियों में चिंता, बाजार पर लंबे समय तक असर की आशंका
बिल्डरों और जमीन कारोबारियों का मानना है कि यदि स्थिति यही रही तो आने वाले महीनों में रीयल एस्टेट बाजार पूरी तरह ठप हो सकता है। महंगी रजिस्ट्री के कारण ग्राहक नई परियोजनाओं की तरफ नहीं आएंगे, और पुराने मकानों की खरीद-बिक्री पर भी गहरी मार पड़ेगी।

वे कहते हैं कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य भले ही राजस्व बढ़ाना हो, लेकिन इससे रीयल एस्टेट के हजारों छोटे-बड़े कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। नई गाइडलाइन लागू होने के साथ ही बाजार में भारी अनिश्चितता छा गई है, और निवेशक स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले महीनों में रीयल एस्टेट सेक्टर की दिशा काफी हद तक सरकार के आगे के फैसलों पर निर्भर करेगी।

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