January 15, 2026

हिंदी साहित्य के दिग्गज विनोद कुमार शुक्ल को मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार, रायपुर में घर पर हुआ सम्मान

gyanpeeth

रायपुर। हिंदी साहित्य की दुनिया में छत्तीसगढ़ के गौरव और देश के शीर्ष कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को शुक्रवार को उनके रायपुर स्थित निवास पर हिंदी का सर्वोच्च सम्मान ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ (Jnanpith Award) प्रदान किया गया। यह क्षण न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारतीय साहित्य के लिए ऐतिहासिक रहा, क्योंकि राज्य से किसी साहित्यकार (CG Jnanpith Winner) को पहली बार यह सम्मान मिला है।

ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आर.एन. तिवारी (General Manager of Jnanpith, R.N. Tiwari) ने विनोद कुमार शुक्ल के घर पहुंचकर उन्हें यह पुरस्कार सौंपा। सम्मान में वाग्देवी की प्रतिमा, प्रशस्ति-पत्र और पुरस्कार की राशि का चेक शामिल था। इस दौरान साहित्यकार का चेहरा गहरी विनम्रता और संतोष से भरा दिखा

“किसी भाषा या विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है”- विनोद कुमार शुक्ल
सम्मान ग्रहण करने के बाद विनोद कुमार शुक्ल (Vinod Kumar Shukla) ने पाठकों और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया में चाहे कुछ भी बदल जाए, भाषाओं और विचारों का सम्मान बचा रहना जरूरी है।

उन्होंने कहा- “जब हिन्दी भाषा (Jnanpith Award Hindi) सहित तमाम भाषाओं पर संकट की बात कही जा रही है, मुझे पूरा विश्वास है कि नई पीढ़ी हर भाषा और हर विचारधारा का सम्मान करेगी। किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है।” उनके शब्द साहित्य के प्रति उनकी आजीवन निष्ठा और नई पीढ़ी से उनकी उम्मीदों को रेखांकित करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जाना था उनका हाल-चाल
पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस पर रायपुर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी विनोद कुमार शुक्ल से मुलाकात कर उनका स्वास्थ्य जाना था। इस दौरान शुक्ल ने कहा था- “लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा है… मैं जल्द घर लौटकर फिर लिखना शुरू करना चाहता हूं।” उनकी यह पंक्ति उनकी साहित्यिक यात्रा के मूल भाव को दर्शाती है।

“अच्छी आलोचना है- एक और बेहतर कविता लिख देना”
अपनी सहज और मृदुभाषी शैली के लिए पहचान रखने वाले विनोद कुमार शुक्ल ने आलोचना को लेकर भी गहरी बात कही। उन्होंने कहा- “अगर किसी अच्छे काम की आलोचना की जाती है, तो वही आलोचना आपकी ताकत बन सकती है। कविता की सबसे अच्छी आलोचना है- एक और बेहतर कविता लिख देना।”

उन्होंने जीवन की असफलताओं, गलतियों और संघर्षों को “बिखराव में छिपे हुए अच्छे को ढूंढने” जैसा बताया और कहा कि उम्मीद ही जीवन की सबसे बड़ी ताकत है। सम्मान समारोह में उन्होंने अपनी मशहूर कविता ‘सबके साथ’ का पाठ भी किया, जिसमें सामूहिक मानव संवेदना की गहरी छाप दिखाई देती है।

विनोद कुमार शुक्ल का साहित्यिक सफर
88 वर्षीय विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में हुआ। कृषि विज्ञान में M.Sc. करने के बाद उन्होंने साहित्य जगत में ऐसा मुकाम पाया, जो उन्हें भारतीय भाषा लेखन का शीर्ष स्तंभ बनाता है।

उनकी (Vinod Kumar Shukla Jnanpith Award) प्रमुख कृतियों में लगभग जय हिंद, नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की, और कई यादगार उपन्यास-कविताएं शामिल हैं। उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ पर फिल्मकार मणि कौल ने फिल्म भी बनाई थी। साहित्य अकादमी पुरस्कार, रजा पुरस्कार, मुक्तिबोध फेलोशिप सहित कई बड़े सम्मान उन्हें प्राप्त हो चुके हैं। हाल ही में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का पेन नाबोकोव अवॉर्ड भी मिला था।

भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार
1965 से दिया जा रहा ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य (Hindi Literature News) का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है। यह पुरस्कार 22 भारतीय भाषाओं के लेखकों को उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए दिया जाता है। पुरस्कार में 11 लाख रुपये, वाग्देवी की प्रतिमा और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार मलयालम के महान साहित्यकार जी. शंकर कुरुप को मिला था।

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