CG : हर घर तक पहुंच रहा औद्योगिक प्रदूषण..!, हवा के झोंकों के साथ उड़ रही काली राख, सैकड़ों लोग बीमार, तालाब का रंग बदल कर काला पड़ा…
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों प्रदूषण का राक्षस असमय लोगों को बीमार बनाकर काल का ग्रास बना रही हैं। शहर से लगे उरला, सिलतरा, बिरगांव, सरोरा, भनपुरी के सैंकड़ों उद्योगों के प्रदूषण की कालिख न सिर्फ बिरगांव नगर-निगम के लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है, बल्कि जहरीले धुएं की आंच राजधानी तक भी पहुंच रही है। दो नगर-निगम के हजारों लोग परेशान हैं। सर्दी के मौसम में इसका और ज्यादा दुष्प्रभाव देखा जा रहा है। निमोनिया और अस्थमा जैसी बिमारियों से कुछ लोग दम भी तोड़ चुके हैं।

इन इलाकों में धुएं की कालिख ऐसी है कि न सिर्फ आम आदमी बल्कि पशु-पक्षी, नदी-पानी में भी यह जहर घुलता जा रहा है। प्रदूषण की मार गाड़ियों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई है। जनरपट ने उरला, सिलतरा, सरोरा और रायपुर में ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान पाया कि उद्योगों से निकलने वाली जहरीली गैस और धूल के मोटे कण घरों तक पहुंच रहे हैं। सुबह गाड़ियों पर और तालाबों के जल सतह और पौधों के पत्तों पर यह स्पष्ट दिखाई देता हैं। यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि क्षेत्रवासियों की रोजमर्रा की त्रासदी बन चुकी है।

राष्ट्रीय संस्थान ने कहा- गंभीर प्रदूषण एरिया
राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने औद्योगिक स्रोतों से होने वाले प्रदूषण का विस्तृत अध्ययन किया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सिलतरा और रायपुर औद्योगिक क्षेत्र को क्रिटिकली पोल्यूटेड एरिया घोषित किया है।

केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के आंकड़ों में प्रदूषण मानक से ज्यादा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम के लाइव डेटा की स्थिति भी चिंताजनक है। शहर के चार स्टेशनों पर लगी मशीनों की रिपोर्ट चौकाने वाली है। इसके मुताबिक पीएम 10 के मानक आंकड़े 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होने चाहिए, वहीं पीएम 2.5 का आंकड़ा 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए।
जनजीवन पर असर, लेकिन प्रशासन मौन
स्थानीय लोग बताते हैं कि चाहे सरकार बदली हो या विधायक, लेकिन सिलतरा और धरसींवा क्षेत्र की हालात जस की तस बनी हुई है। प्रदूषण नियंत्रण की न तो कोई ठोस योजना दिखाई देती है और न ही प्रशासन की ओर से कार्रवाई।
डीडी नगर और रायपुरा तक असर
क्षेत्र पीएम2.5 पीएम 10
सिलतरा 133 238
एस 78 146
भाठागांव बस स्टैंड 8 132
कृषक नगररायपुर 78 146
(नोट-रिपोर्ट के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के मुताबिक, 19 नवंबर की स्थिति में, आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में)

प्रदूषण की मार का असर दीनदयाल उपाध्याय नगर (डीडी नगर) से लेकर रायपुरा क्षेत्र में भी असर देखा जा रहा है। डीडी नगर के मकानों की छतों में काले धुएं की परतें जमने लगी है, वहीं रायपुरा के कई क्षेत्र जैसे इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, अग्रोहा सोसायटी व हाउसिंग बोर्ड की कालोनियों में काले धुएं की परत छतों पर जमने लगी है।
उद्योगों में प्रदूषण के लिए ये जिमेदार
पर्यावरण विभाग- पर्यावरण मंत्री, पर्यावरण सचिव, पर्यावरण संरक्षण मंडल सदस्य सचिव, चीफ इंजीनियर, क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी
उद्योग विभाग- उद्योग मंत्री, उद्योग सचिव, उद्योग संचालक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र
जिला प्रशासन- कलेक्टर
नगर-निगम- महापौर (रायपुर), आयुक्त,
महापौर (बिरगांव), आयुक्त

जहरीली गैसों का लोगों में साइड इफेक्ट
लंग्स में इफेक्ट, सर्दी,खांसी के मरीज बढ़े।
हार्ट के रोगियों के लिए खतरनाक स्थिति।
अस्थमा, सिलिकोसिस के मरीजों को संभलकर रहने की आवश्यकता।
जहरीली गैसों की वजह हवा में आक्सीजन की मात्र कम हो जाती है।
पेड़ पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया घटती है।
कार्बन मोनो ऑक्साइड से खून में आक्सीजन ले जाने की प्रक्रिया बाधित होती है।
