‘शांति के बिना विकास संभव नहीं’, हम नक्सलवाद को खत्म कर रहे हैं, उपराष्ट्रपति ने कहा- माओवादी सरेंडर कर दें
रायपुर। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने की अपील की है। बुधवार को छत्तीसगढ़ के रजत जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे उपराष्ट्रपति ने कहा छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों और सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के सबसे युवा राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ ने अब खुद को सबसे प्रगतिशील और संभावनाशील राज्यों में शामिल कर लिया है।
नक्सलवाद को खत्म कर रहे हैं
उन्होंने कहा, ‘‘गर्व है कि अब हम नक्सलवाद को खत्म कर रहे हैं, जिसने लंबे समय तक राज्य के विकास में बाधा डाली थी। शांति बेहद जरूरी है, क्योंकि शांति के बिना विकास संभव नहीं है।’’ उन्होंने माओवादियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की। उपराष्ट्रपति ने कहा- ‘मैं सभी नक्सलियों से हथियार छोड़ने और प्रशासन के समाने आत्मसमर्पण करने का आग्रह करता हूं।’’
हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शांति
उन्होंने बताया कि केंद्रीय सुरक्षा बलों, राज्य पुलिस, केंद्र और राज्य सरकारों की प्रतिबद्धता तथा स्थानीय समुदायों के सहयोग से अब उन इलाकों में शांति बहाल हो गई है जो कभी हिंसा से प्रभावित थे। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘नक्सलवाद का खात्मा छत्तीसगढ़ की नई सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उठाए गए बड़े कदमों का परिणाम है। सभी मिलकर इस लाल आतंक को खत्म करने में जुटे हैं।’’
आदिवासी समाज का जताया आभार
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने दिखाया है कि परंपराओं का पालन करने वाला क्षेत्र आधुनिकता और आर्थिक विकास के साथ आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकता है। राज्य के गांव, जंगल, नदियां और खदानें संघर्ष और सफलता दोनों की कहानियां बयां करती हैं। आदिवासी समुदायों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘सदियों से उन्होंने राज्य की समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया है। प्रकृति के साथ उनका तालमेल और सामूहिक जीवन के प्रति उनका सम्मान, जलवायु परिवर्तन के दौर में पूरी दुनिया के लिए एक सबक है।’’
सरकार पर भरोसा प्रगति का प्रतीक
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और संपर्क के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। उन्होंने बताया, ‘‘सड़कें, रेलवे और हवाई संपर्क ने दूरदराज के इलाकों को भी राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ दिया है। नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में भी रेलवे नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रगति को सिर्फ जीडीपी से नहीं, बल्कि लोगों के चेहरों पर मुस्कान, शासन पर उनके भरोसे और हर बच्चे की आंखों में झलकती उम्मीद से भी मापा जाता है।’
