January 23, 2026

जापान में घटती आबादी से महासंकट, 1899 के बाद सबसे कम जन्म, पैदा हुए बच्चों से 10 लाख ज्यादा मौतें

JAPAN

टोक्यो। जापान का जनसंख्या संकट गहराता जा रहा है। पिछले साल, 2024 में जापान में पैदा होने वाले बच्चों की तुलना में 10 लाख ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। 1968 में जन्म और मृत्यु का रेकॉर्ड रखने के लिए शुरू हुए सरकारी सर्वेक्षण के बाद से यह एक साल में जनसंख्या में आई सबसे बड़ी गिरावट है। यह लगातार 16वां वर्ष है, जब जापान की जनसंख्या में कमी दर्ज की गई है। इससे देश में काम करने वाले लोग घटे हैं और कई तरह के संकट पैदा हो गए हैं।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान में 2024 में नए जन्मों की संख्या में भारी गिरावट आई है। बीते साल देश में सिर्फ 6,86,061 बच्चे पैदा हुए। यह 1899 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह सबसे कम संख्या है। यानी 2024 में जापान में बीते 127 साल में सबसे कम बच्चे पैदा हुए हैं। वहीं इस साल 16 लाख लोगों की मृत्यु हुई है। यानी एक बच्चा जन्मा तो करीब तीन लोगों की मौत हुई। इससे जनसंख्या में भारी गिरावट आई है।

ये इमरजेंसी जैसी स्थिति: जापानी पीएम
जापान सरकार के बुधवार को जारी नए आंकड़ों से पता चला है कि 2024 में जापानी नागरिकों की संख्या में 908,574 की कमी आई। जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने घटतीआबादी के संकट को एक शांत आपातकाल बताया है। उन्होंने बच्चों की देखभाल के लिए वित्तीय मदद जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं लेकिन जमीन पर इनका असर नहीं दिख रहा है।

जापान में अपनी आबादी घटने से विदेशियों की संख्या बढ़ रही है। इस साल की शुरुआत तक जापान में विदेशी निवासियों की संख्या 36 लाख के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई। यह देश की जनसंख्या का तीन फीसदी है। जापान सरकार ने डिजिटल वीजा और कौशल विकास पहल शुरू करके विदेशी श्रम को अस्थायी रूप से अपनाया है।

हर तीसरा आदमी बूढ़ा
विश्व बैंक के अनुसार, 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन अब जापान की जनसंख्या का 30 फीसदी हैं। यह मोनाको के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा अनुपात है। जापान में पिछले दो दशकों में करीब 40 लाख घरों के खाली हुए हैं। खासतौर से उच्च जीवन-यापन लागत युवाओं को परिवार शुरू करने से रोकती है।

जापान की प्रजनन दर यानी एक महिला की अपने जीवनकाल में जन्म लेने वाले बच्चों की औसत संख्या 1970 के दशक से ही कम रही है। जापान में यह संकट कई दशकों से चल रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सुधार के लिए बड़े स्तर पर प्रयास करने होंगे।

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