छत्तीसगढ़ में स्कूल खुलते ही बिखरी व्यवस्था, बच्चों को नहीं मिली यूनिफार्म और किताबें, TBC ऐप बना सिरदर्द
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही शिक्षा विभाग की अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आ गई हैं। एक ओर जहां मुख्यमंत्री बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दे रहे थे, वहीं स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ा। TBC CG App और बारकोड स्कैनिंग की नई व्यवस्था ने शिक्षकों की पढ़ाने की जिम्मेदारी से ध्यान भटका दिया है।
बच्चे अब भी पुस्तक विहीन
नई व्यवस्था के तहत शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि छात्रों को पाठ्यपुस्तकें (Chhattisgarh (CG) School Book Distribution) तभी दी जाएंगी जब हर एक किताब का बारकोड TBC एप से स्कैन और वेरिफाई हो जाएगा। लेकिन यह ऐप बार-बार एरर दिखा रहा है और नेटवर्क की समस्या के कारण स्कैनिंग की प्रक्रिया बेहद धीमी है। शिक्षकों को मजबूरन कक्षाओं की बजाय मोबाइल लेकर स्कैनिंग में जुटना पड़ रहा है।
शिक्षक पढ़ाने की बजाय स्कैनिंग में उलझे
छग शालेय शिक्षक संघ और शिक्षक साझा मंच ने इस व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई है। संगठन के प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा, “टीबीसी ऐप की वजह से शिक्षक मूल काम छोड़कर तकनीकी कार्यों में उलझ गए हैं। इससे ना सिर्फ पढ़ाई प्रभावित हो रही है बल्कि शिक्षकों की गरिमा भी कम हो रही है।”
क्या है टीबीसी एप?
टीबीसी (पाठ्य पुस्तक निगम) सीजी एप का मतलब छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (Chhattisgarh Textbook Corporation) का मोबाइल एप्लीकेशन है। यह एप्लीकेशन छत्तीसगढ़ राज्य के छात्रों और शिक्षकों के लिए उपयोगी है, जो पाठ्यपुस्तकों, शैक्षिक सामग्री और संबंधित सेवाओं तक पहुंच प्रदान करता है।

84 हजार बच्चों को नहीं मिल सकी किताबें
इस वर्ष शिक्षा विभाग ने किताब वितरण को ऐप से जोड़ दिया, लेकिन सर्वर की कमजोरियों के कारण जिलेभर के 84 हजार से अधिक बच्चों को अभी तक पुस्तकें नहीं मिल सकीं। यूनिफॉर्म वितरण भी इसी कारण रुका हुआ है। इससे पहले हर साल शाला प्रवेशोत्सव के दिन किताबें और यूनिफॉर्म बच्चों को दिए जाते थे, लेकिन इस बार समारोह भी टल गया है।
बालोद के मेड़की और ओरमा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों (Chhattisgarh School Book Distribution) में बच्चों को ना तो शिक्षक मिले, ना ही किताबें या यूनिफॉर्म। 15 से 40 बच्चों की संख्या वाले स्कूलों में दो कक्षाएं एक ही कमरे में बैठने को मजबूर थीं। इससे ग्रामीण शिक्षा की जमीनी हकीकत उजागर हो गई है।
सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, पूर्णकालिक करने की मांग
शिक्षा सत्र शुरू होते ही एक और संकट सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के रूप में सामने आया। अंशकालीन सफाई कर्मियों ने पूर्णकालिक करने और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर रायपुर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसका असर स्कूलों की साफ-सफाई और मूलभूत व्यवस्था पर भी पड़ा है।
शिक्षा व्यवस्था तकनीक में उलझी, बच्चे और शिक्षक दोनों परेशान
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग की डिजिटल व्यवस्था फिलहाल सिरदर्द साबित हो रही है। जब तक शिक्षक किताब स्कैन करेंगे, पढ़ाएंगे कैसे? जब बच्चों को किताबें नहीं मिलेंगी, वे सीखेंगे कैसे? यह सवाल आज छत्तीसगढ़ के हर माता-पिता और शिक्षक के मन में गूंज रहा है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह तकनीकी नवाचार के साथ-साथ जमीनी हकीकत को भी समझे और ऐसी योजनाएं लागू करे जो वास्तव में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करें, न कि उसे तोड़ें।
