January 22, 2026

CG : शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने ED को लगाई फटकार, कहा- ‘बिना सबूत के आरोप लगाने का नया पैटर्न बनाया’

SUP-ED

नईदिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले (Chhattisgarh liquor scam) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। 5 मई को आरोपी अरविंद सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय एस. ओका ने कहा कि ईडी बिना पर्याप्त साक्ष्य के केवल आरोप लगाती है, यह आजकल एक पैटर्न बन चुका है।

अदालत ने ईडी के इस रवैये पर चिंता जताई और पूछा कि आखिर जब कंपनी से आरोपी का सीधा संबंध साबित नहीं हो रहा तो 40 करोड़ की अवैध कमाई का दावा किस आधार पर किया जा रहा है।

ईडी ने मांगा सबूत पेश करने का समय
ईडी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस.वी. राजू ने कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग करते हुए कहा कि उन्हें मामले से जुड़े पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए। इस पर जस्टिस ओका ने दो टूक कहा, “हमने कई मामलों में देखा है कि आप (ईडी) केवल आरोप लगाते हैं, जबकि सबूत नहीं होते।” सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई को स्थगित करते हुए अगली तारीख तय की है, जब ईडी को आरोपों के समर्थन में प्रमाण देने होंगे।

शराब घोटाले में सरकार को हुआ 2,161 करोड़ का नुकसान
यह पूरा घोटाला (CG News) छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग से जुड़ा है, जो 2019 से 2022 के बीच हुआ। ईडी की जांच में दावा किया गया है कि इस अवधि में सरकारी शराब दुकानों के जरिये अवैध शराब बिक्री से राज्य सरकार को 2,161 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस घोटाले के पीछे एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसमें तत्कालीन आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी ए.पी. त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर और अरविंद सिंह सहित कुछ राजनेताओं व मंत्रियों की संलिप्तता थी।

ईडी की कार्रवाई पर विपक्ष हमलावर
इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार और उनके सहयोगी अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। वहीं, भाजपा सरकार की ईडी जांच को लेकर विपक्षी दल लगातार राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से आई ये सख्त टिप्पणी ईडी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

डिजिटल सबूत और दस्तावेज जब्त
ईडी ने दिसंबर 2024 में तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा और उनके परिवार के घरों पर छापेमारी कर कई डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए थे। लेकिन जस्टिस ओका ने इस पर सवाल उठाया कि जब आरोपी अरविंद सिंह का कंपनी से संबंध स्पष्ट नहीं है, तो फिर उनके खिलाफ 40 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप कैसे लगाया जा रहा है?

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