August 6, 2026

CG : शावक की मौत से बौखलाई मादा भालू, भाई-बहन को मार डाला, 4 घंटे तक चीरती रही इंसानी शरीर

BHALUUUUU

कांकेर। छत्तीसढ़ के कांकेर से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक मादा भालू के हमले में भाई-बहन की जान चली गई. यही नहीं भाई-बहन के शव को मादा भालू घंटो नोचती रही. जबकि उनकी एक अन्य बहन जो उनको बचाने गई, वो भी भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई. कांकेर मेडिकल कॉलेज में घायल महिला का इलाज चल रहा है. इस दर्दनाक घटना का एक वीडियो भी सामने आया है.

घटना बुधवार दोपहर की बताई जा रही है. ये पूरी घटना जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर मरकाटोला गांव की है. मृतकों की पहचान हलाल खोर जुर्री और उनकी सगी बहन चमारोन बाई के रूप में हुई है. जानकारी के अनुसार, मरकाटोला गांव निवासी हलाल खोर जुर्री अपने खेत के पास बैठे हुए थे, तभी उननपर मादा भालू का हमला हुआ. हमले में वो गंभीर रूप से घायल हो गए.

भाई को बचाने के प्रयास में बहन की भी मौत
भाई की चीख पुकार सुनकर बहन चमारोन बाई मौके पर पहुंची, जो स्कूल में रसोइया के रूप में काम करती हैं और उस समय स्कूल से लौट रही थीं. उन्होंने अपने भाई को बचाने का प्रयास किया, लेकिन मादा भालू ने उन पर भी हमला कर दिया. हमले में वो भी गंभीर रूप से घायल हो गईं. दोनों भाई-बहन की आवाज एक और बहन खोरीनबाई के कानों में पहुंची, जो उस समय खेत में काम कर रही थीं.

खोरीनबाई ने अपने भाई और बहन को बचाने की कोशिश की, लेकिन वो भी भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गईं. घटना की जानकारी जब आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों तक पहुंची तो बड़ी संख्या में गांव वाले वहां एकत्र हो गए. फिर वन विभाग को सूचना दी गई. वन विभाग और ग्रामीणों ने किसी तरह गंभीर रूप से घायल खोरीनबाई को वहां से निकाला और इलाज के लिए कांकेर मेडिकल कॉलेज भिजवाया.

चार घंटों तक शवों के पास रही मादा भालू
घटना के बाद वन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, वो थी शव को मादा भालू के पास निकालना. ग्रामीणों और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मादा भालू शवों के पास ही डटी रही. जैसे ही कोई शव के पास जाने की कोशिश करता, वो हमले के लिए दौड़ पड़ती. करीब चार घंटे बाद रायपुर से विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंची. टीम ने ट्रैंक्विलाइजर गन की मदद से मादा भालू को बेहोश किया. इसके बाद भालू को काबू किया जा सका.

गांव में पसरा मातम
भालू के हमले से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा भी देखने को मिला. जब वन विभाग बेहोश भालू को लेकर जा रही थी, तब कुछ लोग लाठी-डंडे लेकर उसकी ओर बढ़ गए. पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने लोगों को समझाया. भालू को पिंजरे में बंद कर वहां से ले जाया गया. तभी दोनों मृतकों के शव भी मौके से हटाए सके. एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटने के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है.

बताया जा रहा है कि एक दिन पहले मादा भालू ने अपने ही शावक को नोचकर मार डाला था. वन विभाग ने शावक के शव को अपने कब्जे में ले लिया था. गांव वालो का मानना है कि शावक का शव मादा भालू को आसपास नहीं मिला, इसलिए वो अधिक आक्रमक हो गई और उसने लोगों पर हमले शुरू कर दिए.

मुख्य खबरे

error: Content is protected !!