आत्मानंद स्कूलों के 8 हजार शिक्षक-कर्मचारी धरने पर बैठे : नियमितीकरण समेत 5 मांगों को लेकर प्रदर्शन, बोले- सम्मान और सुरक्षा चाहिए
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में काम करने वाले संविदा शिक्षक और कर्मचारियों ने मंगलवार को रायपुर के तूता धरना स्थल पर दो दिवसीय सांकेतिक धरना-प्रदर्शन की शुरुआत की।
संघ का दावा है कि प्रदेशभर से करीब 8 हजार शिक्षक और कर्मचारी इसमें शामिल हुए। छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक और कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने सरकार के सामने अपनी 5 प्रमुख मांगें रखीं।
पहली: संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
दूसरी: जिम्मेदारियों के अनुसार उचित वेतनमान दिया जाए।
तीसरी: हर साल वार्षिक वेतन वृद्धि का प्रावधान किया जाए।
चौथी: स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, अवकाश और सेवा सुरक्षा जैसी सुविधाएं दी जाएं।
पांचवीं: सेवा शर्तों में सुधार कर सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण बनाया जाए।

यह सरकार के खिलाफ नहीं, न्याय की मांग
प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव ने कहा कि, यह आंदोलन किसी सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की मांग के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मानंद स्कूलों में वर्षों से काम कर रहे हजारों शिक्षक आज भी कम वेतन, असुरक्षित नौकरी और भविष्य की अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। सरकार को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
‘आत्मानंद स्कूलों की सफलता में शिक्षकों की बड़ी भूमिका’
संघ के संरक्षक कमल वर्मा ने कहा कि, आत्मानंद विद्यालयों को प्रदेश में पहचान दिलाने में संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों का बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में उनके भविष्य को अनिश्चित नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से जल्द सकारात्मक फैसला लेने की मांग की। संघ के महासचिव हरिओम शर्मा ने कहा कि, संगठन हमेशा बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके में विश्वास रखता है। लेकिन अब मांगों पर फैसला करने में ज्यादा देरी स्वीकार नहीं होगी।
कई संगठनों का मिला समर्थन
धरना-प्रदर्शन को कई शिक्षक, कर्मचारी और सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिला। वक्ताओं ने कहा कि यह सिर्फ आत्मानंद स्कूलों के कर्मचारियों का मामला नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले कर्मचारियों के सम्मान और समान अवसर का मुद्दा है।
आगे की रणनीति पर होगा फैसला
संघ के मीडिया प्रभारी राहुल कुमार पाण्डेय ने बताया कि, धरने का पहला दिन शांतिपूर्ण और सफल रहा। अगर सरकार जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लेती है, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय करेगा।
धरना स्थल पर शिक्षक “सम्मानजनक सेवा हमारा अधिकार है”, “शिक्षक का सम्मान, शिक्षा का सम्मान” और “नियमितीकरण हमारा अधिकार है” जैसे नारे लगाते रहे। उनका कहना था कि जब तक उनकी जायज मांगों पर निर्णय नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
