July 31, 2026

IBR Achiever ARUNIMA : ओपन माइक से राष्ट्रीय फलक तक, बाल कलाकार अरुणिमा शर्मा की संगीत साधना गाथा

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छत्तीसगढ़ की संगीत माटी की अनुपम देन, 10 वर्षीय नन्ही बाल कलाकार अरुणिमा शर्मा (आद्या) ने बेहद कम उम्र में लोक कला से लेकर शास्त्रीय संगीत के राष्ट्रीय मंचों तक जो सफलता हासिल की है, वह विस्मित करने वाली है। नवा रायपुर के साहित्य उत्सव के ‘ओपन माइक’ मंच से शुरू हुआ उनका सफर INDIA BOOK OF RECORDS तक पहुँच गया हैं। अरुणिमा की संगीत साधना आज देश के सबसे प्रतिष्ठित मंचों और प्रदेश के सर्वोच्च नेतृत्व की सराहना का गवाह बन चुका है।

सफर की शुरुआत: रायपुर साहित्य उत्सव की वह गूंजजनवरी 2026 में नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के ‘ओपन माइक’ सत्र में अरुणिमा ने पहली बार सार्वजनिक मंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। अपने नन्हे हाथों से हारमोनियम संभालकर जब उन्होंने सुप्रसिद्ध साहित्यकार मीर अली मीर का छत्तीसगढ़ी गीत “नंदा जाही का रे…” गाया, तब इतिहास रच गया। मूल गीतकार मीर अली मीर स्वयं मंत्रमुग्ध होकर दौड़ते हुए मंच पर आए और इस नन्ही प्रतिभा के साथ सहर्ष सेल्फी लेकर उन्हें “छत्तीसगढ़ की नन्ही कोयल” की उपाधि दी।

लोक मंचों और राज्य प्रतियोगिताओं में विजय पताका : साहित्य उत्सव के बाद अरुणिमा ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न प्रतिष्ठित आंचलिक और राज्य-स्तरीय मंचों पर अपनी गायकी का लोहा मनवाया:बस्तर आइडल (Bastar Idol): बस्तर अंचल के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सिंगिंग रियलिटी शो में देश-प्रदेश के हुनरमंदों के बीच कड़ा मुकाबला करते हुए अरुणिमा ने सेकंड रनर-अप का खिताब अपने नाम किया। राजनांदगांव मड़ई: ऐतिहासिक राजनांदगांव मड़ई मेले के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय सिंगिंग कॉन्टेस्ट में उन्होंने अपनी सुरीली तान से जजों को प्रभावित कर विजेता (Winner) की ट्रॉफी उठाई। दैनिक भास्कर YB चैम्प्स 6 (Young Bhaskar Champs): प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह के नेशनल सिंगिंग कंपटीशन ‘वाईबी चैम्प्स 6’ में उन्होंने देश भर के बाल गायकों को पछाड़ते हुए नेशनल विनर(फर्स्ट रनर) बनने का गौरव हासिल किया।

शास्त्रीय संगीत की कठिन साधना और राष्ट्रीय सम्मान : लोक कला के साथ-साथ अरुणिमा ने संगीत की सबसे कठिन विधा ‘भारतीय शास्त्रीय संगीत’ में भी अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है:नटरंग महोत्सव (Indian Festival of Art and Culture): इस राष्ट्रीय महोत्सव में उन्होंने सबसे गंभीर और कठिन राग भैरव को चुना। द्रुत लय में छोटा ख्याल गाते हुए उन्होंने पारंपरिक बंदिश “जागो मोहन प्यारे” को इतनी परिपक्वता से प्रस्तुत किया कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर कैटेगरी में  प्रथम स्थान , भव्य ट्रॉफी और प्रतिष्ठित दीप्तिमान सम्मान से नवाजा गया।मोहनम शास्त्रीय गायन प्रतियोगिता: इस बेहद कठिन शास्त्रीय गायन प्रतियोगिता में भी उन्होंने शुद्ध सुर साधना का परिचय देते हुए द्वितीय स्थान अर्जित किया।

राष्ट्रीय फलक और उभरते हुए नए आयाम : अरुणिमा की प्रतिभा अब डिजिटल और राष्ट्रीय खेल मंचों तक भी दस्तक दे चुकी है: खेलो इण्डिया (Khelo India): खेलो इंडिया के राष्ट्रीय खेल मंच पर उन्होंने एक लाइव बैंड के साथ छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक विधा ‘ददरिया’ की बेहद ऊर्जावान लाइव प्रस्तुति दी, जिससे राष्ट्रीय दर्शक छत्तीसगढ़ी संस्कृति से रूबरू हुए। हर घर टैलेंट (आदित्य फिल्म प्रोडक्शन): इस विख्यात डिजिटल हंट के कठिन ऑडिशंस को पार करते हुए वे सफलतापूर्वक फाइनल राउंड में अपनी जगह बना चुकी हैं।Phytositaare नेशनल सिंगिंग प्रतियोगिता: देशव्यापी स्तर पर आयोजित इस गायन प्रतियोगिता में देश भर के सुरों को पछाड़ते हुए वे अब फाइनल वोटिंग राउंड में पहुँच चुकी हैं।

मुख्यमंत्री और विस अध्यक्ष से सार्वजनिक सराहना : अरुणिमा के जीवन का सबसे ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण तब आया जब उन्होंने राज्य के सर्वोच्च मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) डॉ. रमन सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में उन्होंने स्वयं हारमोनियम बजाते हुए राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) और राजगीत (अरपा पैरी के धार) की अद्भुत लाइव प्रस्तुति दी।इस नन्ही बच्ची के सुर और हारमोनियम पर उँगलियों का जादू देखकर मुख्यमंत्री साय और स्पीकर डॉ. रमन सिंह इतने प्रभावित हुए कि दोनों ने मुख्य मंच से माइक पर सार्वजनिक रूप से अरुणिमा का नाम लेकर उनकी भूरी-भूरी प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।

आकाशवाणी रायपुर केंद्र पर प्रसारण : अरुणिमा की कलात्मक परिपक्वता को देखते हुए प्रसार भारती के आकाशवाणी रायपुर केंद्र ने उनका एक विशेष साक्षात्कार (Interview) रिकॉर्ड किया। इसके साथ ही आकाशवाणी के बेहद लोकप्रिय बाल-युवा कार्यक्रम ‘फुलवारी’ में अरुणिमा द्वारा गाए गए छत्तीसगढ़ के पारंपरिक भरथरी गायन और अन्य मधुर लोकगीतों का विशेष प्रसारण किया गया, जिसे पूरे प्रदेश के श्रोताओं ने सराहा।

    निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ के संगीत का स्वर्णिम भविष्यअपने कला गुरु के कुशल मार्गदर्शन में तराशी गई अरुणिमा शर्मा मात्र एक बाल कलाकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की ध्वजवाहक बन चुकी हैं। बस्तर आइडल के मंच से लेकर नटरंग महोत्सव के राष्ट्रीय शिखर और आकाशवाणी की तरंगों तक का उनका यह सफर यह साबित करता है कि वे आने वाले समय में भारतीय संगीत जगत की एक महान महानायिका बनने की ओर अग्रसर हैं।

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