आवारा कुत्ते, पूजा और राजनीति : जगदलपुर में अब तिलक लगाकर होगी नसबंदी, नगर निगम का ‘सनातनी’ अभियान
जगदलपुर । देश बदल रहा है, शहर बदल रहे हैं, राजनीति भी बदल रही है, और अब शायद आवारा कुत्तों की किस्मत भी बदल रही है। जगदलपुर नगर निगम ने आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान की शुरुआत की, लेकिन सिर्फ शुरुआत नहीं की। उसे आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। कुत्तों को तिलक लगाया गया। दूध पिलाया गया। पूजा हुई, कैमरे लगे, फोटो खिंची और फिर वही हुआ जो हर फोटो के बाद होता है, राजनीति शुरू हो गई।
एबीसी सेंटर में संस्कृति की एंट्री
महाराणा प्रताप वार्ड के एसएलआरएम सेंटर में एबीसी सेंटर का उद्घाटन हुआ। एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल। नाम सुनकर लगता है कि कोई वैज्ञानिक प्रक्रिया होगी। लेकिन यहां विज्ञान से पहले संस्कृति पहुंच गई। महापौर ने कुत्तों को तिलक लगाया, दूध पिलाया। अब तस्वीरें सोशल मीडिया पर हैं, जिन्हें जनता देख रही है। कुछ लोग खुश हैं कि कम से कम कुत्तों को सम्मान तो मिला। कुछ लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब सरकारी योजनाओं का उद्घाटन पूजा और फोटो के बिना अधूरा माना जाएगा?
कांग्रेस को पूजा से दिक्कत या फोटो से?
कांग्रेस ने कहा कि अगर पूजा ही करनी है तो डॉग हाउस बनाइए और रोज पूजा करिए। सरकारी पैसा भी बच जाएगा। अब ये बयान भी दिलचस्प है। क्योंकि राजनीति में कोई भी किसी का काम देखकर खुश नहीं होता। अगर कोई गड्ढा भर दे तो विपक्ष पूछता है कि फोटो क्यों खिंचवाई। अगर फोटो न खिंचवाए तो पूछता है कि काम हुआ कहां?
सनातन, कालभैरव और आवारा कुत्ते
उधर महापौर ने जवाब दिया। बोले कि सनातन परंपरा में कुत्तों का संबंध भगवान कालभैरव और राहु-केतु से माना जाता है। यानी अब आवारा कुत्तों की नसबंदी सिर्फ नगर निगम का काम नहीं रही। उसका आध्यात्मिक पक्ष भी सामने आ गया है। जनता अब कन्फ्यूज है कि ये स्वास्थ्य अभियान है, धार्मिक अनुष्ठान है या चुनाव पूर्व सांस्कृतिक अभ्यास।
500 कुत्तों का लक्ष्य और सरकारी प्रक्रिया
वैसे नगर निगम का दावा बड़ा है। हर महीने 500 कुत्तों की नसबंदी होगी। 22 कुत्तों को सेंटर में रखा गया है। उनका ऑपरेशन होगा। टीकाकरण होगा। फिर उन्हें वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा जहां से पकड़ा गया था। यानी कुत्ते भी अब सरकारी फाइल की तरह एक प्रक्रिया से गुजरेंगे। पकड़ो। सेंटर लाओ। पूजा करो। ऑपरेशन करो। वापस छोड़ दो।
असली मुद्दा कुत्ते नहीं, तस्वीरें हैं
नगर निगम ने जनता के लिए 1100 नंबर भी जारी किया है। अगर आपके इलाके में आवारा कुत्ते हैं तो सूचना दीजिए। टीम आएगी। बाकी प्रक्रिया आप अब समझ ही चुके हैं। इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात ये है कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या पर चर्चा कम हो रही है और कुत्तों के तिलक की फोटो पर बहस ज्यादा। शायद यही हमारे समय की सबसे बड़ी सफलता है। मुद्दा चाहे जो हो कैमरा हमेशा केंद्र में रहता है।
