कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी सुनाएगी जनजातीय वीरों की गाथा, देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय का होगा भव्य प्रदर्शन
रायपुर। गणतंत्र दिवस के मौके पर इस साल छत्तीसगढ़ की झांकी भी कर्तव्य पथ पर दिखाई जाएगी, जो देश भर के लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने वाली है. इस झांकी में जनजातीय वीरों की गाथा सुनाई जाएगी. साथ ही ‘स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित इस झांकी में जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा भी भव्य रूप में प्रस्तुत की जाएगी.
छत्तीसगढ़ की झांकी में क्या खास होगा?
इस झांकी के जरिए उन अमर जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों के विरुद्ध संघर्ष किया और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी.
इन महान बलिदानियों की स्मृति में नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय स्थापित किया गया है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है.
इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था.
झांकी की शुरुआत में रहेंगे वीर गुंडाधुर
इस झांकी की शुरुआत में साल 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को को दिखाया गया.
धुर्वा समाज के इस महानायक ने अन्याय के विरुद्ध जनजातीय समाज को एकजुट किया.
भूमकाल विद्रोह के प्रतीक आम की टहनियां और सूखी मिर्च झांकी में विशेष रूप से प्रदर्शित हैं.
विद्रोह की व्यापकता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे.
शहीद वीर नारायण सिंह भी रहेंगे
झांकी के पीछे के भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए नजर आएंगे.
उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के हित में संघर्ष किया तथा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई.
पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, देशभक्ति और स्वतंत्रता के प्रति अटूट संकल्प को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है.
