January 21, 2026

डोनाल्ड ट्रंप का जबरदस्त प्रहार, रुपए में आई ऐतिहासिक गिरावट, धराशाई हुआ शेयर बाजार

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मुंबई। यूरोप या यूं कहें कि नाटो पर ट्रंप का प्रहार लगातार तीखा होता जा रहा है. जिसकी वजह से शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. ग्रीनलैंड के मुद्दे ट्रंप का स्टैंड और यूरोप का हठ शेयर बाजार और भारतीय करेंसी दोनों के एक अभिशाप बनता जा रहा है. जहां सेंसेक्स में 1000 अंकों की गिरावट देखने को मिली है. वहीं रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर आ गया है. ऐसी ऐतिहासिक गिरावट रुपए में कभी नहीं देखने को मिली है. वैसे शेयर बाजार रुपए में गिरावट का एक कारण ट्रंप की धमकियां ही नहीं है. बल्कि विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली, कच्चे तेल की कीमत और तिमाही नतीजों का बेहतर ना होना भी है. लगातार तीन दिनों से चल रही गिरावट की वजह से निवेशकों को 17.82 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार और रुपए के आंकड़े किस तरह की कहानी को बयां कर रहे हैं.

शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट
अमेरिका की ओर से नाटो देशों पर टैरिफ की धमकी से बीते मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार धड़ाम हो गया. वहीं, भारतीय बाजार में भी मंगलवार की 1000 अंकों की गिरावट आज यानी बुधवार को भी बनी रही. मार्केट का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले. वहीं, 10 बजकर 30 मिनट के करीब सेंसेक्स 740 अंक गिर गया. वहीं, निफ्टी 50 में 220 अंकों की गिरावट देखी गई.

राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से लगातार लिए जा रहे अतरंगी फैसलों के चलते मार्केट की पूरी चाल ही बदल गई है. बीते मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार करीब डेढ़ फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ था. वहीं, आज इंडियन मार्केट की चाल भी पहले जैसे ही बनी हुई है. मंगलवार को बाजार 1000 से ज्यादा अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ था. मगर आज सुबह जब बाजार खुला तो वह स्थिर दिखाई दे रहा था. मगर साढ़े दस बजे के करीब मार्केट एकाएक गोता लगा गया. अभी खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 800.35 अंक की गिरावट के साथ 81,380.12 पर ट्रेड कर रहा है.

शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिल रही है. पहले बात सेंसेक्स की करें तो 16 जनवरी को सेंसेक्स 83,570.35 अंकों पर था, तब से अब तक सेंसेक्स में 2,445.9 अंकों की गिरावट देखने को मिल चुकी है. वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 16 जनवरी को 25,694.35 अंकों पर था, जिसमें अब तक 774.55 अंकों की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

क्यों गिर रहा है बाजार
ट्रंप की ग्रीनलैंड की धमकियां- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने और यूरोपीय संघ के साथ दोबारा व्यापार युद्ध शुरू करने की धमकियों के बीच बढ़ते तनाव के कारण एशियाई बाज़ारों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखी गई. इन बयानों से अमेरिकी निवेश से विदेशियों के पैसे निकालने का डर फिर से बढ़ गया है, जिसे आमतौर पर सेल अमेरिका ट्रेड कहा जाता है. ऐसा पिछली बार अप्रैल में देखा गया था, जब लिबरेशन डे टैरिफ की घोषणाओं के बाद वॉल स्ट्रीट एक ही दिन में 2% से ज्यादा गिर गया था और अमेरिकी डॉलर में एक महीने से अधिक समय की सबसे बड़ी गिरावट आई थी. इस वैश्विक गिरावट के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर भागे, जिससे सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए. ट्रंप अपने रुख पर कायम रहे और उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के अपने इरादे से पीछे हटने का सवाल ही नहीं है. उन्होंने बल प्रयोग की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया. यूरोप के खिलाफ नए टैरिफ लगाने की चेतावनियों ने एक नए वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ा दी है. इसी बीच, यूरोपीय संघ गुरुवार को ब्रसेल्स में एक आपात बैठक करने जा रहा है, जबकि निवेशक बुधवार को दावोस में विश्व आर्थिक मंच में ट्रंप के भाषण का इंतजार कर रहे हैं.
कमजोर घरेलू कमाई- कंपनियों के नतीजों के सीज़न से भी बाज़ार को ज्यादा राहत नहीं मिली. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों का भरोसा और कमजोर किया. इससे यह चिंता बढ़ी कि शेयरों की ऊंची कीमतें कंपनियों की असली मजबूती से आगे निकल गई हैं. आईटी इंडेक्स 1% गिरा और यह सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले सेक्टरों में शामिल रहा. परसिस्टेंट सिस्टम्स का तिमाही मुनाफा बढ़ने के बावजूद इसके शेयर 3.5% गिर गए, क्योंकि कई ब्रोकरेज हाउस ने आगे सीमित बढ़त की बात कही और ऊंची कीमतों को वजह बताया. कमजोर नतीजों और सतर्क भविष्य के अनुमान के कारण निवेशक अब शेयर चुनने में ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं, जिससे पूरे बाज़ार पर दबाव बना हुआ है.

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर- भारतीय रुपया बुधवार को अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे पहले से दबाव में चल रहे शेयर निवेशकों की मुश्किलें और बढ़ गईं. वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की सोच के कारण रुपये पर दबाव बना रहा. डॉलर के मुकाबले रुपया दिसंबर के बीच में बने अपने पुराने रिकॉर्ड निचले स्तर 91.0750 से नीचे फिसल गया और आखिरी बार करीब 91.2950 पर कारोबार करता दिखा. इस गिरावट के पीछे ग्रीनलैंड विवाद, लगातार विदेशी पूंजी का निकलना और अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता जैसे कारण रहे. इस महीने अब तक रुपया करीब 1.5% टूट चुका है, जो 2025 में आई लगभग 5% की गिरावट के बाद और कमजोरी को दिखाता है. इससे आयात महंगा होने और विदेशी निवेशकों के भरोसे को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौजूदा नीति पर ही टिके रहते हुए बाज़ार में कभी-कभी दखल दिया, ताकि बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो, लेकिन उसने किसी खास स्तर पर रुपये को थामने की कोशिश नहीं की.

विदेशी निवेशक कर रहे हैं बिकवाली- विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाज़ार का भरोसा और कमजोर हुआ है. FIIs ने लगातार ग्यारहवें दिन भी शुद्ध बिकवाली जारी रखी. मंगलवार, 20 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने करीब 2,938 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जो बढ़ते वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच उनकी सतर्कता को दिखाता है. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ हद तक संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन वह बाज़ार की गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रही. उसी दिन DIIs ने लगभग 3,666 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे थोड़ा सहारा मिला, लेकिन विदेशी निवेशकों का पैसा निकलना अब भी बाज़ार की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा कारण बना हुआ है.

निवेशकों को 17.82 लाख करोड़ का नुकसान
इस बिकवाली से निवेशकों की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति हो गई, जिससे सभी BSE-लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन गिरकर 449.76 लाख करोड़ रुपये हो गया. तीन दिनों में शेयर बाजार निवेशकों को काफी मोटा नुकसान हो चुका है. 16 जनवरी को बीएसई का मार्केट कैप 4,67,84,606.92 करोड़ रुपए था, जिसमें अब तक 17.82 लाख करोड़ रुपए की गिरावट देखने को मिल चुकी है. यह गिरावट एक ऐसे बाजार को दिखाती है जो एक साथ कई मुश्किलों से जूझ रहा है, लगातार विदेशी फंड का बाहर जाना, घरेलू कमाई में असमानता, और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता, मंगलवार की तेज बिकवाली के बाद बेंचमार्क तीन महीने से ज्यादा के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गए.

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