September 12, 2026

चाय वाले की चैंपियन बेटी, थाईलैंड की जूनियर हैंडबॉल चैंपियनशिप में जीता सिल्वर मेडल, अंबाला के टी स्टॉल पर पिता करते हैं काम

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अंबाला। क्या कभी सोचा है कि एक गरीब व्यक्ति, जो की चाय की दुकान पर काम करता है, उसकी बेटी इंटरनेशनल लेवल पर सिल्वर मेडल जीत सकती है. जी, हां ऐसा ही कुछ अंबाला को बेटी अंजली ने कर दिखाया है. अंजली थाईलैंड में संपन्न इंटरनेशनल जूनियर हैंडबॉल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रही. अंजली के पिता चाय की दुकान पर काम करते हैं और लाल कुर्ती कॉलोनी में किराए के मकान में रहते हैं. वे मूल रूप बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं. 20 साल पहले काम की तलाश में वे अंबाला आए थे. इसके बाद परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर बेटी को आज उन्होंने इस मुकाम पर पहुंचाया है.

3 भाई-बहनों में सबसे बड़ी है अंजलीः 2 बहन और एक भाई में अंजली सबसे बड़ी है. अंजली के पिता राजकुमार ने कहा कि “उनकी बेटी की खेलों में ऐसी लगन लगी कि उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वो लगातार मेहनत कर रही है. एक दिन उसे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में कैंप में शामिल होने का मौका मिला. उसमें एक महीने की ट्रेनिंग हुई. ट्रेनिंग के दौरान अंजली सिलेक्ट हुई. फिर वो थाईलैंड चली गई, जहां पर 9 टीमें आईं और फिर उनका फाइनल मैच उज़्बेकिस्तान से हुआ. उस मैच में उज़्बेकिस्तान को जीत प्राप्त हुई और अंजलि को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा.”

सपना भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतनाः जब अंजलि से पूछा गया कि आगे के बारे में क्या सोचा है? तो अंजलि ने कहा कि “ये तो रजत पदक है. आगे गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन करने का इरादा है. हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज से मिलकर आशीर्वाद लेने का मौका मिला और काफी अच्छा लगा है.”

चाय दुकान के मालिक को अंजली की उपलब्धि पर गर्वः जनरपट ने उस चाय की दुकान के मालिक रिंकू कुमार से भी बात की जहां अंजलि के पिता काम करते हैं तो उन्होंने कहा कि “अंजली की इस उपलब्धि के लिए गर्व महसूस हो रहा है. काफी अच्छा लग रहा है कि हमारे यहां काम करने वाले राजकुमार की बेटी दुनिया में हरियाणा ही नहीं पूरे भारत का नाम रोशन कर रही है. हमें भरोसा है कि आगे भी देश के लिए कुछ बड़ा करेगी.” दुकानदार ने कहा कि “राज कुमार पिछले 20 साल से हमारी दुकान पर काम कर रहा है. अब तो ये हमारे घर के मेंबर जैसा है.”

लाल कुर्ती की बेटी की उपलब्धि पर गर्वः अंजलि के पिता राजकुमार और उसकी मां रामवती को बेटी की इस उपलब्धि पर काफी खुशी है. उन्होंने कहा कि हम बिहार के रहने वाले हैं. पिछले 20 साल से लाल कुर्ती कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहे हैं. हमारी बेटी ने जो ये उपलब्धि हासिल की है, इससे हम काफी खुश हैं. पूरा लाल कुर्ती बेटी की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है. अंजलि पढ़ाई और खेल दोनों में अच्छी है और उसने हमारा नाम रोशन किया है. पूरे लाल कुर्ती के लोगों से अपील है कि अंजली को सपोर्ट करें. इसके साथ ही सरकार से अपील है कि अंजली के लिए नौकरी की व्यवस्था की जाए.

11 साल की उम्र से की थी शुरुआत: अंजली ने 11 वर्ष की उम्र से हैंडबॉल खेलना शुरू किया था. वह रोज सुबह और शाम लगभग तीन घंटे की प्रैक्टिस करती है और साथ ही अंबाला के एसडी कॉलेज में अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए है. अंजली वर्तमान में बीए पार्ट टू में है. वो इससे पहले भी कई स्टेट और नेशनल लेवल प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी है. गुजरात में आयोजित साई इंटरनेशनल कैंप में प्रशिक्षण लेने के बाद उसके खेल में और निखार आया, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिला.

UP कैंप से चयन और थाईलैंड तक का सफर: अंजली का चयन यूपी के अलीगढ़ में लगे विशेष ट्रेनिंग कैंप में हुआ, जहां उन्होंने एक महीने तक कड़ी मेहनत की. इसी आधार पर चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम इंडिया में शामिल किया. इसके बाद अंजली थाईलैंड रवाना हुईं, जहां नौ देशों की टीमों के बीच खेले गए टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया.

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