January 14, 2026

‘गलत जानकारी देने वाले जेल जाएंगे’, डेप्युटी सीएम ने कहा- 2003 की मतदाता सूची में जिनके परिजनों का नाम नहीं उनकी जांच होगी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR ) की प्रक्रिया जारी है। राज्य में 99.51 प्रतिशत फॉर्म मतदाताओं को वितरित किए जा चुके हैं जबकि 77.80 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ के डेप्युटी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। विजय शर्मा ने कहा कि फार्म सब्मिट करने के दौरान अगर कोई गलत डॉक्यूमेंट पेश करता है तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

शनिवार को मीडिया से चर्चा करते हुए डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने कहा- मतदाता सूची की शुचिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। हर संदिग्ध एंट्री की जांच की जाएगी। इसके साथ ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहा डेप्युटी सीएम ने
डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा- 2003 के मूल रेकॉर्ड में जिन लोगों के या उनके परिजनों का कोई दस्तावेज नहीं है उनके नाम अचानक कैसे शामिल हुए। यह एक बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का परिवार, रिश्तेदार या कोई भी पारिवारिक उपस्थिति 2003 के मतदाता सूची में नहीं हो उसके मूल निवास और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

SIR को देश के लिए अहम प्रक्रिया बताते हुए विजय शर्मा ने कहा- यह पूरी प्रक्रिया देश के संसाधनों और नागरिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी है। अवैध रूप से देश में रहकर अगर कोई मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए कोई गतल दस्तावेज देता है तो उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम और अवैध प्रवासी अधिनियम के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया है कि अगर कोई दोषी पाया जाता है कि उसे जेल भेजा जाएगा।

घुसपैठियों को टेंशन लेने की आवश्यकता
विजय शर्मा ने कहा कि लोगों को SIR से डरने की आवश्यकता नहीं है। बीएलओ का सहयोग करें। वैध नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है, शासन-प्रशासन उनकी सहायता के लिए तत्पर है। चिंता करने की जरुरत अवैध घुसपैठियों को होनी चाहिए। घुसपैठ, दहशत या अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कांग्रेस ने बयान पर जताई आपत्ति
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि चुनाव आयोग इस संबध में गृहमंत्री विजय शर्मा से स्पष्टीकरण मांगे कि उन्होंने किस हैसियत से यह बयान दिया है। एसआईआर आयोग का काम है या राज्य सरकार का। राज्य के मंत्री कैसे बिना एसआईआर पूरा हुये किसी नागरिक की नागरिकता पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। वे दो साल से गृहमंत्री हैं, देश में मोदी की 11 साल से सरकार है। उसके बाद घुसपैठिये का हव्वा क्यों बनाया जा रहा है। गृहमंत्री प्रदेश के एसी, एसटी नागरिकों को अप्रत्यक्ष धमका रहे हैं और उनकी नागरिकता पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

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